जनवरी-मार्च की तिमाही में छोटी इलायची का भाव ऊंचा एवं तेज रहने की उम्मीद

12-Nov-2024 11:19 AM

कोच्चि । दुनिया के सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश- ग्वाटेमाला में उत्पादन घटने की संभावना को देखते हुए भारतीय निर्यातकों को रमजान से पूर्व खाड़ी क्षेत्र के देशों में छोटी (हरी) इलायची का निर्यात बढ़ाने में अच्छी सफलता मिलने का भरोसा है।

ग्वाटेमाला से जो सूचना प्राप्त हो रही है उसके आधार पर निर्यातकों ने वहां छोटी इलायची का उत्पादन 2023-24 सीजन की तुलना में 2024-25 सीजन के दौरान 44 प्रतिशत घटकर 18,884 टन पर सिमट जाने का अनुमान लगाया है।

केवल थ्रिप्स कीट के प्रकोप से ही वहां इलायची की 34 प्रतिशत फसल बर्बाद हो गई जबकि प्राकृतिक आपदाओं से भी लगभग 1000 टन के समतुल्य फसल के क्षतिग्रस्त होने की आशंका है। 

इडुक्की (केरल) के एक विश्लेषक के अनुसार ग्वाटेमाला में इलायची का उत्पादन मोटे तौर पर 40-50 प्रतिशत लुढ़ककर 17 से 20 हजार टन के बीच सिमट जाने का अनुमान है।

वहां इलायची के प्रथम चरण की तुड़ाई-तैयारी पूरी हो चुकी है। दरअसल बाजार भाव को देखते हुए उत्पादक नियत समय से कुछ पहले ही इलायची की तुड़ाई कर रहे हैं जिससे इसके दाने पूरी तरह परिपक्व नहीं हैं और उसका वजन भी कम देखा जा रहा है।

इससे भारत को फरवरी 2025 तक रमजान पर्व से पूर्व अपनी इलायची का निर्यात बढ़ाने में अच्छी सफलता मिल सकती है। भारतीय इलायची की क्वालिटी काफी अच्छी होती है। 

समीक्षकों के मुताबिक ग्वाटेमाला की भांति इस वर्ष भारत में भी इलायची का उत्पादन 40-50 प्रतिशत तक घटने की संभावना है। पुराने स्टॉक की आवक समाप्त होने वाली है इसलिए कीमतों में उछाल आने के आसार हैं।

ग्वाटेमाला की इलायची का भाव भारतीय उत्पाद से करीब 30 प्रतिशत ऊंचा चल रहा है जिससे वैश्विक बाजार में भारत को अग्रता प्राप्त होना निश्चित है।