जूट के लिए स्टॉक सीमा में कटौती

21-Jan-2026 12:47 PM

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने जमाखोरी रोकने तथा कीमतों में तेजी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से व्यापारियों एवं शेलर्स (गांठ बनाने वाले) के लिए जूट-परसन की स्टॉक सीमा में कटौती कर दी है जिससे जूट बोरियों (बारदाना) तथा अन्य मूल्य संवर्धित उपादों के निर्यात के लिए मिलों को कच्चे माल की समुचित आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार पिछले कुछ महीनों के दौरान जूट की कीमतों में भारी तेजी आई है और इसका दाम उछलकर सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी ऊपर पहुंच गया है। इसे नियंत्रित करने के लिए जूट पर भंडारण सीमा को सख्त बनाने का निर्णय लिया गया है।

संशोधित नियम के अनुसार अब प्रेसिंग क्षमता से युक्त बेकर्स एक साथ 1200 क्विंटल से अधिक जूट का स्टॉक अपने पास नहीं रख सकते हैं। इसी तरह स्टॉकिस्टों के लिए भी जूट की उच्चतम भंडारण सीमा 25 क्विंटल निर्धारित की गयी है। गैर पंजीकृत व्यापारी 5 क्विंटल तक जूट का स्टॉक रख सकते हैं जबकि जूट मिलों को 45 दिनों की खपत क्षमता एवं जरुरत के समतुल्य जूट का स्टॉक रकने की अनुमति दी गयी है।

व्यापारिक फार्मों को प्रत्येक पखवाड़े सरकारी पोर्टल पर अपने स्टॉक पोजीशन की घोषणा करने के लिए कहा गया है। इसके साथ-साथ व्यापारियों से नई स्टॉक सीमा के अनुरूप अपने जूट भण्डार को अगले 10 दिनों में घटाने के लिए भी कहा गया है।

भारत में जूट का उत्पादन मुख्यतः पश्चिम बंगाल, बिहार, आसाम, मेघालय एवं आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में होता है। बंगाल इसका सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त हैं। वहां जूट मिलों की संख्या भी सबसे ज्यादा है। बांग्लादेश ने भारत को जूट के निर्यात पर प्रतिबन्ध लगा दिया है और भारत के अन्दर भी स्टॉक को दबाने की कोशिश की जा रही है जिससे इसका भाव तेज हो गया है।