कालीमिर्च की वैश्विक मांग एवं आपूर्ति में संतुलन रहने की संभावना

01-Nov-2025 11:16 AM

कोच्चि। हालांकि वर्ष 2024 की तुलना में 2025 के दौरान कालीमिर्च का वैश्विक उत्पादन कुछ घटकर 5.20 लाख टन के करीब रह गया लेकिन पिछला बकाया  स्टॉक मौजूद रहने तथा खपत में कुछ कमी आने के कारण इस महत्वपूर्ण मसाले की मांग एवं आपूर्ति के बीच लगभग संतुलन बना हुआ है।

अंतर्राष्ट्रीय कालीमिर्च समुदाय (आईपीसी) का कहना है कि वैश्विक मांग एवं जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजदू है मगर इसके बकाया स्टॉक में कुछ कमी आ सकती है। 

आईपीसी ने वर्ष 2026 में कालीमिर्च का वैश्विक उत्पादन सुधरकर 5.33 लाख टन पर पहुंचने का अनुमान लगाया है जिससे आपूर्ति की स्थिति में कुछ सुधार आ सकता है। वैसे बकाया स्टॉक कम रहने से कुल उपलब्धता में ज्यादा बढ़ोत्तरी नहीं हो पायेगी।

भारत में उत्पादन लगातार घटता जा रहा है जो गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि वियतनाम के बाद भारत दुनिया में कालीमिर्च का दूसरा सबसे प्रमुख उत्पादक देश है। 

व्यापार विश्लेषकों के अनुसार भारत सहित अन्य प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देशों में फसल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है ताकि आने वाले समय में कालीमिर्च के उत्पादन में अच्छी बढ़ोत्तरी सुनिश्चित हो सके।

मौसम की हालत अभी तक फसल के लिए अनुकूल बनी हुई है जिससे अगले वर्ष उत्पादन बेहतर होने के आसार हैं। कालीमिर्च के प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देशों में वियतनाम, भारत, इंडोनेशिया, ब्राजील, श्रीलंका एवं मलेशिया आदि शामिल है।

समीक्षकों के मुताबिक अनिश्चित एवं अनियमित बारिश, तापमान में उतार-चढ़ाव, उच्च आद्रता एवं कीड़ों-रोगों का प्रकोप कालीमिर्च की फसल को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं। इसके फलस्वरूप उत्पादन में कभी कमी आती है तो कभी वृद्धि हो जाती है।