कम बिजाई एवं कमजोर मानसून से रुई बाजार में तेजी

23-Jun-2026 12:39 PM

अहमदाबाद। दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमजोर स्थिति, बिजाई क्षेत्र में गिरावट एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजार में आई तेजी के प्रभाव से घरेलू प्रभाग में रुई का भाव ऊंचा और मजबूत होने लगा है। गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, मध्य प्रदेश एवं रास्थान जैसे शीर्ष कपास उत्पादक प्रान्तों में मानसून या तो पहुंचा नहीं है या बहुत कमजोर रहा है।

वैश्विक बाजार की तेजी, घरेलू मंडियों में कमजोर आवक तथा टैक्सटाइल उद्योग की बढती मांग को देखते हुए सरकारी एजेंसी - भारतीय कपास निगम (सीसीआई) ने पिछले कुछ दिनों के अंतर अपने स्टॉक की रुई का न्यूनतम बिक्री मूल्य करीब 1100 रुपए प्रति कैंडी (356 क्जिलो) बढ़ा दिया। इससे थोक मंडियों में भी तेजी आ गयी।

केंद्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम साप्ताहिक आकड़ों के अनुसार चालू खरीफ सीजन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर कपास का कुल उत्पादन क्षेत्र 19 जून तक केवल 17.13 लाख हेक्टेयर पर पहुंच सका जो पिछले साल की समानअवधि के बिजाई क्षेत्र 22.82 लाख हेक्टेयर से करीब 25 प्रतिशत कम है। उत्तरी क्षेत्र के राज्यों - पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान में कपास के रकबे में भारी गिरावट आई है।

एक अग्रणी व्यापारिक संस्था - कॉटन एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय बाजार में आई तेजी का सीधा असर रुई के घरेलू बाजार मूल्य पर दिखाई पड़ रहा है। न्यूयार्क स्थित इंटर कांटिनेंटल एक्सचेंज (आईसीई) में दिसंबर 2026 की डिलीवरी के लिए रुई का वायदा भाव 75 सेंट प्रति पौंड से बढ़कर 80 सेंट प्रति पौंड पर पहुंच गया है। इससे रुई का आयात महंगा होने की सम्भावना है।

सरकार ने रुई के आयात को 1 जून से 31 अक्टूबर 2026 तक की अवधि के लिए सीमा शुल्क से मुक्त किया है। आईसीई में रुई का जुलाई अनुबंध भी बढ़कर 76.05 सेंट प्रति पौंड हो गया है।

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