कनाडा के मटर निर्यातकों को भारी आघात लगने की संभावना

30-Oct-2025 04:15 PM

सस्काटून। भारत सरकार द्वारा पीली मटर के आयात पर 30 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगाए जाने से कनाडा के उत्पादकों एवं निर्यातकों को भारी धक्का लगने की आशंका है। भारत कनाडाई पीली मटर का सबसे प्रमुख बाजार है और यदि यहां आयात घटता है तो कनाडा के किसानों को उचित दाम पर अपना उत्पाद की बिक्री करने में भारी कठिनाई होगी।

रूस तथा यूक्रेन की कठिन चुनौती एवं सख्त प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए कनाडा को अपनी मटर के निर्यात ऑफर मूल्य में भारी कटौती करने के लिए विवश होना पड़ा है जबकि भारत के खरीदार अब उसकी कीमतों को और भी घटाने के लिए कह सकते हैं। 

कनाडा के साथ दो और मसले जुड़े हुए हैं। एक तो वहां इस बार मटर का उत्पादन बेहतर हुआ है और दूसरे, चीन में निर्यात लगभग बंद हो गया है क्योंकि वहां कनाडाई मटर के आयात पर 100 प्रतिशत का भारी-भरकम सीमा शुल्क लगा हुआ है।

भारत की भांति चीन भी कनाडाई मटर का एक अग्रणी आयातक देश रहा है। यदि इन दोनों प्रमुख बाजारों का द्वार बंद हो गया तो कनाडा को नए-नए बाजारों की तलाश करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा जो आसान काम नहीं है क्योंकि भारत और चीन की कमी को पूरा करने की क्षमता किसी अन्य देश में नहीं है। 

1 नवम्बर से भारत के आयातक कनाडा सहित किसी अन्य देश के साथ अगर पीली मटर के आयात का अनुबंध करते हैं तो उस पर 30 प्रतिशत का सीमा शुल्क प्रभावी हो जाएगा। कनाडा के उत्पादक एवं निर्यातक भारत सरकार के इस निर्णय से काफी हताश-निराश हो गए हैं।

यद्यपि भारत में पीली मटर के आयात पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है और शुल्क की दर भी 7 दिसम्बर 2023 से पूर्व के स्तर से काफी नीचे है लेकिन कनाडा को झटका देने के लिए 30  प्रतिशत का सीमा शुल्क भी काफी है। 

कनाडा में पीली मटर का भाव पहले ही घटकर गत वर्ष से करीब 34 प्रतिशत नीचे आ चुका है। आमतौर पर वहां 10 डॉलर प्रति बुशेल के मूल्य स्तर पर किसानों को कुछ लाभ मिलता है जबकि वर्तमान भाव उससे काफी नीचे चल रहा है।

29 अक्टूबर को मीडियम ग्रेड की नंबर 1 पीली मटर का औसत मूल्य 6.95 डॉलर प्रति बुशेल दर्ज किया गया। यद्यपि अमरीका तथा कुछ अन्य देशों में मटर दाल की मांग रहती है मगर कनाडा में मटर की  प्रोसेसिंग क्षमता सीमित होने से दाल का निर्माण कम होता है और वह साबुत मटर के निर्यात को प्राथमिकता देता है।