खरीफ फसलों के उत्पादन का सरकारी लक्ष्य हासिल होने में संदेह
16-Jul-2025 04:16 PM
नई दिल्ली। हालांकि देश के अधिकांश भागों में मानसून की अच्छी बारिश हुई है और अब भी हो रही है जिसके आधार पर सरकार ने खरीफ फसलों के भारी-भरकम उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है
लेकिन जानकारों का कहना है कि अनेक क्षेत्रों में अत्यन्त मूसलाधार बारिश होने तथा भयंकर बाढ़ आने से खासकर दलहन-तिलहन की फसलों को काफी नुकसान हो सकता है। इसी तरह कम वर्षा वाले या सूखा ग्रस्त क्षेत्रों में भी खरीफ फसलों का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने 2025-26 के खरीफ सीजन के लिए 1688.80 लाख टन खाद्यान्न के उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है जिसमें 1207.50 लाख टन चावल, 403.90 लाख टन मोटे अनाज तथा 77.40 लाख टन दलहन का उत्पादन लक्ष्य शामिल है।
इसी तरह तिलहन उत्पादन का लक्ष्य 283.70 लाख टन, गन्ना का 4670 लाख टन तथा कपास 339 लाख गांठ नियत किया गया है। ज्ञात हो कि कपास की प्रत्येक गांठ 170 किलो की होती है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार खरीफ फसलों की बिजाई तथा वर्षा की स्थिति के दृष्टिकोण से जुलाई सबसे महत्वपूर्ण महीना होता है। देश में सर्वाधिक वर्षा इसी महीने में होती है लेकिन बाढ़ का सबसे ज्यादा खतरा भी जुलाई-अगस्त में ही रहता है।
अभी तक मानसून की हालत अच्छी है मगर आगामी समय में हालात बदल सकते हैं। वैसे देश के 260 से अधिक जिले अब भी बारिश की कमी से जूझ रहे हैं जबकि अनेक जिलों में सामान्य औसत से बहुत ज्यादा बारिश होने के कारण कई इलाके जलमग्न हो गए हैं।
मौसम विभाग के जुलाई 2025 में सामान्य औसत से 6 प्रतिशत अधिक वर्षा होने का अनुमान लगाया है। जुलाई में वर्षा का सामान्य औसत 280.40 मि०मी० आंका गया है।
बेशक खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से आगे चल रहा है लेकिन इसमें खास-खास राज्यों का ज्यादा योगदान है। कुछ राज्यों में बिजाई पिछड़ रही है क्योंकि उसके कई भागों में अभी तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई है।
इसी तरह कुछ प्रांतों में मानसून की पहली बौछार के साथ फसलों की बिजाई तो हुई थी मगर बाद में उसे बारिश का सहारा नहीं मिला। इससे उसकी प्रगति में बाधा पड़ रही है। आगे का मौसम एवं मानसून खरीफ फसलों के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा।
