खरीफ फसलों का यथार्थ
25-Oct-2025 10:47 AM
दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान देश के कुछ राज्यों में अत्यन्त मूसलाधार वर्षा होने, खेतों में पानी भर जाने तथा भयंकर बाढ़ आने से खरीफ फसलों को काफी नुकसान पहुंचने की आशंका व्यक्त की जा रही थी और माना जा रहा था कि धान, दलहन, तिलहन, मक्का तथा कपास आदि का उत्पादन घट सकता है।
लेकिन उपग्रह पर आधारित कुछ फसल सर्वेक्षण की रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि अधिशेष वर्षा एवं भयंकर बाढ़ के बावजूद खरीफ फसलों को नगण्य क्षति पहुंची या कम से कम उतनी हानि नहीं हुई जिसका अनुमान पहले लगाया जा रहा था।
दरअसल अगस्त-सितम्बर के दौरान देश के कई राज्यों में जोरदार बारिश हुई थी जिसमें महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, गुजरात एवं तेलंगाना आदि शामिल थे। इन प्रांतों के कई इलाकों में नदी-नालों में उफान की वजह से बाढ़ की गंभीर विभीषिका भी सामने आई थी।
पंजाब में खरीफ फसलों के कुल क्षेत्रफल में 95 प्रतिशत भागीदारी धान के रकबे की रहती है। इस बार पंजाब को बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित होने वाला राज्य माना गया लेकिन अब जो तस्वीर उभरकर सामने आई है उससे पता चलता है कि समूचे प्रान्त में 2 लाख हेक्टेयर से भी कम क्षेत्र में खरीफ फसलें क्षतिग्रस्त हुई हैं।
पिछले साल की तुलना में इस वर्ष खरीफ सीजन के दौरान पंजाब में धान का कुल उत्पादन क्षेत्र कुछ बढ़कर 32.50 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा था जिसमें बासमती का रकबा भी शामिल है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय खरीफ फसलों का उत्पादन अनुमान जारी करने के लिए देश के सभी राज्यों से आंकड़े एकत्रित कर रहा है। नवम्बर के प्रथम सप्ताह में इस उत्पादन अनुमान की घोषणा होने की संभावना है।
दरअसल जब तक जबरदस्त बारिश का दौर जारी था तब तक फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका बनी हुई थी लेकिन अब परिदृश्य में काफी बदलाव आ गया है।
कई क्षेत्रों में खेतों की मिटटी में नमी का पर्याप्त अंश मौजूद रहने से फसलों की औसत उपज दर में सुधार आने के आसार हैं जिससे कुल उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका घटती जा रही है।
कुछ क्षेत्रों में वर्षा-बाढ़ से फसल की क्वालिटी अवश्य प्रभावित हुई है और किसानों को उसका उचित मूल्य प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है।
खरीफ फसलों की कटाई-तैयारी जोर पकड़ने लगी है और धान की सरकारी खरीद भी बढ़ती जा रही है। खरीफ फसलों के उत्पादन का मोटा या आरम्भिक आंकड़ा सरकारी अनुमान के साथ ही सामने आ सकेगा।
