खरीफ कालीन चावल का उत्पादन 12 करोड़ टन के करीब होने का सरकारी अनुमान
20-Nov-2024 07:50 PM
नई दिल्ली । क्षेत्रफल में अच्छी बढ़ोत्तरी तथा दक्षिण-पश्चिम मानसून के सीजन में भरपूर वर्षा होने से चालू खरीफ सीजन के दौरान धान-चावल का घरेलू उत्पादन शानदार होने की उम्मीद है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के मुताबिक 2023-24 के खरीफ मार्केटिंग सीजन में 1132.50 लाख टन चावल का उत्पादन हुआ था जबकि 2024-25 के वर्तमान सीजन में करीब 6 प्रतिशत बढ़कर 1199.30 लाख टन (लगभग 12 करोड़ टन) पर पहुंच सकता है।
धान का क्षेत्रफल भी पिछले साल के 404.50 लाख हेक्टेयर से 9 लाख हेक्टेयर बढ़कर इस वर्ष 413.50 लाख हेक्टेयर के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
दरअसल चावल की कीमतों में तेजी-मजबूती का माहौल बरकरार रहने से इस बार किसानों को धान का रकबा बढ़ाने का अच्छा प्रोत्साहन मिला।
दिलचस्प तथ्य यह है कि सरकार ने चावल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अनेक नीतिगत उपाय लागू किए जिसमें गैर बासमती सफेद चावल के व्यापरिक निर्यात पर प्रतिबंध लगाना, सेला चावल पर 20 प्रतिशत का निर्यात शुल्क लागू करना,
खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत चावल की बिक्री करना तथा भारत ब्रांड नाम से 29 रुपए प्रति किलो की दर से अपनी एजेंसियों के माध्यम से आम लोगों को इसका स्टॉक उपलब्ध करवाना आदि शामिल है मगर इसके बावजूद चावल के खुले बाजार मूल्य में कोई खास गिरावट नहीं आई।
इन उपायों का असर सिर्फ इतना पड़ा कि चावल की कीमतों में तेजी का परवाह थम गया और इसका भाव एक निश्चित सीमा में लगभग स्थिर हो गया।
अब शानदार उत्पादन की उम्मीद से सरकार ने चावल की सभी साबुत किस्मों के शुल्क मुक्त निर्यात की अनुमति प्रदान कर दी है। सरकारी स्टॉक में चावल का पर्याप्त भंडार मौजूद है और घरेलू प्रभाग में आपूर्ति की स्थिति सुगम बनी हुई है।
