News Capsule/न्यूज कैप्सूल: भारत का 50 लाख टन गेहूं निर्यात: वैश्विक बाजार पर असर सीमित
23-Apr-2026 12:02 PM
News Capsule/न्यूज कैप्सूल: भारत का 50 लाख टन गेहूं निर्यात: वैश्विक बाजार पर असर सीमित
★ भारतीय गेहूं की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार से करीब 22–25 डॉलर प्रति टन अधिक हैं। जहां रूस और यूक्रेन का गेहूं लगभग 235–240 डॉलर/टन के आसपास उपलब्ध है, वहीं भारत का गेहूं 265–270 डॉलर/टन पर ऑफर हो रहा है। ऐसे में कीमत-संवेदनशील देशों के लिए भारत आकर्षक विकल्प नहीं बन पा रहा।
★ यह निर्यात कागजों पर भले बड़ा दिखता हो, लेकिन वास्तविकता में सीमित ही रहेगा। निर्यात तभी होगा जब कुछ समय के लिए बाजार परिस्थितियां अनुकूल हों, न कि लगातार प्रतिस्पर्धा के आधार पर।
★ घरेलू कारण भी कीमतें ऊंची रखने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2,585 प्रति क्विंटल, साथ ही लॉजिस्टिक्स और हैंडलिंग लागत, भारतीय गेहूं को महंगा बना देते हैं। यही वजह है कि भारत का गेहूं वैश्विक बाजार में सीधे मुकाबले में कमजोर पड़ता है।
★ इसके अलावा, निर्यात में अन्य दिक्कतें भी हैं जैसे ऊंचे फ्रेट रेट (भाड़ा), जहाजों की उपलब्धता में कमी और हाल की बारिश से गुणवत्ता प्रभावित (नमी ज्यादा, दाने सिकुड़े और चमक कम) .
★ वैश्विक मांग भी फिलहाल भारत के पक्ष में नहीं है। अधिकांश आयातक देश ब्लैक सी क्षेत्र (रूस-यूक्रेन) से सस्ता गेहूं लेना पसंद कर रहे हैं।
★ हालांकि, भारत से कुछ सीमित निर्यात पड़ोसी देशों जैसे नेपाल और बांग्लादेश को हो सकता है, लेकिन यह मात्रा बहुत बड़ी नहीं होगी।
★ भारत तभी वैश्विक बाजार में प्रभावी भूमिका निभा सकता है जब अंतरराष्ट्रीय कीमतें तेजी से बढ़ें या सप्लाई में कोई बड़ा व्यवधान आए।
★ फिलहाल की स्थिति में, भारत वैश्विक गेहूं बाजार में “पहली पसंद” नहीं बन पा रहा है।
