खरीफ कालीन दलहन-तिलहन की सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से किसानों को भारी घाटा

24-Oct-2025 08:38 PM

नई दिल्ली। हालांकि खरीफ कालीन दलहन तिलहन फसलों की कटाई-तैयारी एवं मंडियों में आवक पहले ही आरंभ हो चुकी है मगर सरकारी एजेंसियों की खरीदारी शुरू नहीं होने से किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे दाम पर अपना उत्पाद बेचने के लिए विवश होना पड़ रहा है।

ध्यान देने की बात है कि केन्द्र सरकार मूल्य समर्थन योजना के तहत एमएसपी पर दलहन-तिलहन की खरीद के प्रस्ताव को एक माह पूर्व ही स्वीकृति प्रदान कर चुकी है। समझा जाता है

कि दलहन-तिलहन में नमी का अंश स्वीकृत स्तर से ज्यादा होने के कारण सरकारी एजेंसियां इसकी खरीद से परहेज कर रही है लेकिन सरकारी खरीद के अभाव में किसानों को भारी घाटा हो रहा है क्योंकि उसे नीचे दाम पर अपना उत्पाद बेचना पड़ रहा है। 

मोटे अनुमान के अनुसार 24 सितम्बर से अब तक किसान 9 लाख टन से अधिक दलहन-तिलहन की बिक्री कर चुके हैं। इसमें वे पांच उत्पाद- उड़द, मूंग, सोयाबीन, मूंगफली एवं तिल शामिल है जिसकी सरकारी खरीद शुरू होने का इंतजार किया जा रहा है।

केन्द्र सरकार उत्तर प्रदेश एवं गुजरात में तुवर, उड़द, मूंग, सोयाबीन, मूंगफली एवं तिल की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर करने की स्वीकृति पहले ही प्रदान कर चुकी है जिस पर लगभग 13,890 करोड़ रुपए का खर्च बैठने का अनुमान लगाया गया है।

बाद में सरकार ने कर्नाटक में मूंग की खरीद की स्वीकृति  भी प्रदान कर दी। तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश द्वारा दलहन-तिलहन की खरीद के आग्रह पर विचार किया जा रहा है।

इसी तरह महाराष्ट्र एवं राजस्थान सरकार ने भी केन्द्र से खरीद प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति देने का अनुरोध किया है। इस पर भी विचार हो रहा है। 

गुजरात में मूंगफली की सरकारी खरीद अगले सप्ताह से शुरू होने की संभावना है। मध्य प्रदेश सरकार ने सोयाबीन के लिए भावान्तर भुगतान योजना शुरू करने की घोषणा करते हुए केन्द्र से इसकी अनुमति मांगी है अगर भी तक इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी नैफेड एवं एनसीसीएफ को केवल पूर्व पंजीकृत किसानों से दलहन-तिलहन खरीदने का निर्देश दिया गया है।