खाद्य निगम के चावल की कमजोर क्वालिटी के खिलाफ जांच के आदेश

28-Oct-2024 10:49 AM

संगरूर । केन्द्रीय पूल में खाद्यान्न का सर्वाधिक योगदान देने वाले राज्य- पंजाब में धान की खरीद धीमी गति से होने के कारण किसानों में आक्रोश अभी जारी है जबकि इस बीच एक नया मामला सामने आ गया है जिससे भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के साथ-साथ शैलर मालिकों में भी हड़कंप मचा हुआ है।

समझा जाता है कि संगरूर जिला के गोदामों से खाद्य निगम द्वारा देश के विभिन्न भागों में जो चावल भेजा गया उसकी क्वालिटी हल्की होने की शिकायत सामने आई थी।

जब इसकी जांच हुई तो 19 में से 15 सैम्पल गुणवत्ता की कसौटी पर खरा नहीं उतरा। इसे देखते हुए केन्द्रीय खाद्य, उपभोक्ता मामले एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने भारतीय खाद्य निगम के चेयरमैन- सह प्रबंध निदेशक (सीएमडी) को पत्र भेजकर इस सम्पूर्ण मामले की गहन जांच-पड़ताल करने तथा 15 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट भेजने के लिए कहा है। 

जानकारों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में शैलर मालिकों और खाद्य निगम के स्थनीय अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत हो सकती है और जांच होने के बाद ही सच्चाई सामने आ सकेगी। लेकिन इतना आवश्यक है कि इन लोगों की नींद हराम हो गई है और उस पर गाज गिरने की आशंका बनी हुई है।

दूसरी ओर खाद्य निगम के स्टाफ यूनियन के अध्यक्ष का कहना है कि सरकार का यह आदेश शैलर मालिकों एवं खाद्य निगम के कर्मचारियों के साथ नाइंसाफी है।

प्राप्त सूचना के अनुसार वर्ष 2022-23 में जिस चावल का भंडारण किया गया था उसे 2024 में लगी स्पैशलों के माध्यम से देश के विभिन्न भागों में बेचा गया। एक प्रान्त में चावल की क्वालिटी को घटिया बताते हुए कहा गया है कि यह मनुष्य के खाने के लायक नहीं है। 

अध्यक्ष के अनुसार खनिज एवं विटामिन के मिश्रण वाले फोर्टिफाइड चावल को लम्बे समय तक गोदामों में रखने पर उसकी क्वालिटी स्वाभाविक रूप से प्रभावित हो जाती है।

सही समय पर इसे खपत के लिए गंतव्य स्थानों तक पहुंचाना खाद्य निगम और खाद्य मंत्रालय का दायित्व है और इसके लिए शैलर मालिकों तथा निगम के स्टॉफ को दोषी ठहराना गलत है।