खाद्य सब्सिडी बिल बजट अनुमान से काफी अधिक रहने की संभावना

24-Oct-2025 05:13 PM

नई दिल्ली। केन्द्रीय आम बजट में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 2.03 लाख करोड़ रुपए की खाद्य सब्सिडी का प्रावधान किया गया है जबकि इसकी वास्तविक राशि उससे 10-15 प्रतिशत अधिक रहने की संभावना है क्योंकि खाद्यान्न की खरीद में बढ़ोत्तरी होगी उसके परिवहन, भंडारण  एवं रख रखाव पर ज्यादा खर्च बैठेगा और उसे वितरित करने का व्यय अलग से लगेगा।

केन्द्रीय पूल से खाद्यान्न की निकासी भी रियायती मूल्य पर की जा रही है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत वर्तमान समय में देश के लगभग 81 करोड़ लोगों को प्रतिमाह 5 किलो की दर से मुफ्त में अनाज वितरित किया जा रहा है। मुफ्त राशन स्कीम की अवधि 31 दिसम्बर 2028 तक बढ़ाई गई है और इस पर 11.8 ट्रिलियन रुपए खर्च होने का अनुमान है। 

खरीफ कालीन धान तथा अन्य फसलों की खरीद का नया मार्केटिंग सीजन 1 अक्टूबर 2025 से आरंभ हो चुका है और केन्द्रीय एजेंसी- भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) तथा उसकी सहयोगी प्रांतीय एजेंसियों द्वारा किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान की जोरदार खरीद की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि सरकारी सब्सिडी के 70 प्रतिशत से अधिक भाग का आवंटन खाद्य निगम को ही किया जाता है। खाद्य निगम के लिए बजट में पहले 1.40 लाख करोड़ रुपए की सब्सिडी का प्रावधान किया गया था मगर अब इसे बढ़ाकर 1.70 लाख करोड़ निर्धारित   किया गया है। 

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए निगम को अभी तक 75,921 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त हो चुकी है जो संशोधित बजट प्रावधान का 53 प्रतिशत है। इसके अलावा वित्त मंत्रालय ने अन्य खर्चों के लिए उसे 50,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि अग्रिम तौर पर प्रदान की है।

निगम को यह अग्रिम राशि 31 मार्च 2026 तक वापस लौटानी है। खाद्य निगम को चालू वित्त वर्ष के दौरान 25,880 करोड़ रुपए का अल्पकालीन ऋण भी प्राप्त होना है।

अधिशेष अनाज स्टॉक के संचालन हेतु निगम को यह ऋण लेना आवश्यक होगा। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार जब तक खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) तथा अन्य विधियों के तहत खाद्यान्न की निकासी विशाल मात्रा में नहीं होती है

तब तक भंडारण संचालन का खर्च काफी ऊंचा रहेगा। 1 अक्टूबर 2025 को खाद्य निगम के पास 350 लाख टन चावल एवं 315.10 लाख टन गेहूं के साथ कुल करीब 665.30 लाख टन खाद्यान्न का स्टॉक उपलब्ध था।