खाद्य, उर्वरक एवं ईंधन सब्सिडी में 5 प्रतिशत की कटौती
02-Feb-2026 12:52 PM
नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 1 फरवरी को लोकसभा में पेश किया गया केंद्रीय आम बजट अधिकांश सेक्टर्स की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि केंद्र सरकार का वित्तीय स्वास्थ्य पूरी तरह चंगा नहीं है। आवश्यक सामाजिक सुरक्षा क्षेत्र पर होने वाले खर्च से कटौती किए जाने से कृषि, ग्रामीण विकास, रोजगार एवं किसानों की आमदनी पर प्रतिकूल असर पड़ने की सम्भावना है।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार प्रति वर्ष खरीफ और रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में इजाफा करती है और इसी समर्थन मूल्य पर विशाल मात्रा में धान तथा गेहूं की खरीद करती है। इससे खाद्य सब्सिडी में निरंतर बढ़ोत्तरी हो रही है। लेकिन अगले वित्त वर्ष के लिए खाद्य, उर्वरक एवं ईंधन (एलपीजी सिलेंडर) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र के लिए बजट आवंटन में करीब 4.7 प्रतिशत की कटौती करके 4.3 लाख करोड़ (43 ट्रिलियन रुपए) निर्धारित किया गया है। संशोधित आकड़ों के अनुसार 2025-26 के वित्त वर्स में खाद्य सब्सिडी के मद में 4.10 लाख करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है इसे मुकाबले तो बजट आवंटन कुछ ऊंचा है मगर वित्त वर्ष 2025-26 की सम्पूर्ति अवधि (अप्रैल-मार्च) के लिए स्वीकृत कुल बजट आवंटन की तुलना में 4.7 प्रतिशत कम है।
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि ऋण का लक्ष्य निर्धारित करने की दिशा में मुख्य संचालनीय अभिकरण वित्तीय घाटा है और सरकार इस घाटे को नियत लक्ष्य के अन्दर रखने में सफल हुई है। वित्त वर्ष 2021-22 में इस वित्तीय घाटे को 4.5 प्रतिशत से नीचे रखने का संकल्प व्यक्त किया गया था और वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के सापेक्ष यह वित्तीय घाटा 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
