ला नीना के कमजोर पड़ने तथा जून-जुलाई में अल नीनो के आने की संभावना

04-Feb-2026 07:53 PM

तिरुअनन्तपुरम। वर्षा सहित मौसम चक्र- ला नीना लगातार कमजोर पड़ता जा रहा है जबकि कुछ मौसम मॉडल्स इस तरह के संकेत दे रहे हैं कि अल नीनो मौसम चक्र का उदय जून 2026 से हो सकता है जो अगले कुछ महीनों तक सक्रिय रह सकता है। आमतौर पर अल नीनो मौसम चक्र के दौरान भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ जाता है। 

ऑस्ट्रेलियाई मौसम ब्यूरो (बोम) के अनुसार ला नीना मौसम चक्र की सक्रियता गायब हो गई है और मध्यवर्ती ट्रॉपिकल प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान फिलहाल न्यूट्रल अल नीनो- सॉदर्ण ऑसिलेशन (एनसो) की रेंज (माइनस 0.80 डिग्री सेल्सियस से प्लस 0.80 डिग्री सेल्सियस) के बीच देखा जा रहा है।

आगामी समय में वहां तापमान का कैसा रुख रहता है उसी पर अल नीनो का निर्माण निर्भर करेगा। यदि तापमान न्यूट्रल रेंज से बढ़कर प्लस वाले रेंज में पहुंचता है तो अल नीनो के आने की संभावना बढ़ जाएगी। तापमान जितना ऊंचा होगा, अल नीनो की ताकत इतनी ही बढ़ जाएगी। 

इधर भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा है कि चार माह की अवधि वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दूसरे हाफ में अल नीनो का आगमन हो सकता है।

मानसून की शुरुआत जून में होती है और जुलाई तक इसका आधा भाग रहता है। शेष आधा भाग अगस्त-सितम्बर में रहता है। इसका मतलब यह हुआ कि जुलाई के बाद अल नीनो की सक्रियता बढ़ सकती है।

ध्यान देने की बात है कि जुलाई-अगस्त को भारत में सर्वाधिक वर्षा वाला महीना माना जाता है। इन दो महीनों में खरीफ फसलों की सबसे ज्यादा खेती होती हैं।

जून में अल नीनो के आने के संकेत बहुत कम मॉडल्स दे रहे हैं। अल नीनो की सक्रियता से यदि जुलाई-अगस्त में या उसके बाद वर्षा कम होती है तो समस्या उत्पन्न हो सकती है।