लम्बे रेशेवाली रूई के आयात में जबरदस्त बढ़ोत्तरी
24-Oct-2025 03:36 PM
मुम्बई। हालांकि भारत में एक्स्ट्रा लोंग एवं लम्बे रेशे वाली श्रेणी की रूई का उत्पादन 2023-24 सीजन के 1.00 लाख टन से सुधरकर 2024-25 के सीजन में 1.10 लाख टन पर पहुंचने का अनुमान लगाया गया
लेकिन उद्योग की तेजी से बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए यह पर्याप्त नहीं था। इसके फलस्वरूप विदेशों से इस उच्च क्वालिटी की रूई का आयात इसी अवधि में 90 हजार टन से 194 प्रतिशत उछलकर 2.65 लाख टन के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया।
अंतर्राष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति (आईसीएसी) की नई रिपोर्ट के अनुसार 2024-25 सीजन के दौरान 1.10 लाख टन के उत्पादन के साथ भारत लोंग एवं एक्सट्रा लोंग रूई का सबसे प्रमुख उत्पादक देश बन गया
और इसके बाद अमरीका, मिस्र, चीन तथा पेरू का स्थान रहा। भारत में उत्पादन का पैटर्न तो लगभग पिछले साल जैसा ही रहा मगर अमरीका और मिस्र में किसानों ने इसका उत्पादन बढ़ाने में अच्छा उत्साह दिखाया।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत में इस उच्च श्रेणी की रूई की खपत 2023-24 के सीजन में करीब 95 हजार टन हुई थी जो 2024-25 के सीजन में बढ़कर 1.50 लाख टन पर पहुंच गई।
इसका आयात भी लगभग 200 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2.65 लाख टन पर पहुंच गया। भारत में इस उच्च किस्म की रूई के उपयोग एवं आयात में भारी इजाफा देखा जा रहा है।
सरकार ने रूई के आयात को 31 दिसम्बर 2025 तक शुल्क मुक्त कर दिया है। भारत मुख्यत: मिस्र तथा अमरीका से इस रूई का आयात करता है।
उल्लेखनीय है कि भारत इस रूई का निर्यात भी करता है। इसका निर्यात 2023-24 के 1.55 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 1.87 लाख टन पर पहुंच गया।
इसके अलावा भारत से अन्य किस्मों की रूई का भी निर्यात किया जाता है। 2024-25 के सीजन में निर्यात-प्रदर्शन उत्साहवर्धक नहीं रहा।
