महाराष्ट्र में हुई बेमौसमी वर्षा से कपास उत्पादकों की मुसीबत बढ़ी
05-Nov-2025 08:24 PM
नागपुर। कपास के अग्रणी उत्पादक राज्य- महाराष्ट्र के सबसे प्रमुख उत्पादक क्षेत्र- विदर्भ संभाग में हाल के दिनों में हुई भारी बेमौसमी वर्षा ने किसानों की मुसीबत बढ़ा दी है। इस बारिश से न केवल फसल को नुकसान हुआ है बल्कि उसकी क्वालिटी भी प्रभावित हुई है।
कपास के गोले (बॉल) में नमी का अंश बहुत बढ़ जाने से सरकारी क्रय केन्द्रों पर उसे बेचने में भारी कठिनाई हो रही है जबकि खुली मंडियों में व्यापारी काफी नीचे दाम पर इसकी खरीद का प्रयास कर रहे हैं।
सरकारी नियम के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर केवल उसी कपास की खरीद की जाएगी जिसमें नमी का अंश 8-12 प्रतिशत तक हो। लेकिन महाराष्ट्र के कुछ जिलों में कपास में 12 से 20 प्रतिशत तक नमी का अंश पाया जा रहा है।
केन्द्र सरकार ने कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2024-25 की तुलना में 589 रुपए बढ़ाकर 2025-26 सीजन के लिए मीडियम रेशेवाली श्रेणी का 7710 रुपए प्रति क्विंटल तक लम्बे रेशेवाली किस्मों का 8110 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है।
किसान चाहते हैं कि उसे अपनी कपास का कम से कम न्यूनतम समर्थन मूल्य अवश्य प्राप्त हो। केन्द्रीय एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) एमएसपी पर किसानों से इसकी खरीद के लिए तैयार हैं लेकिन उसकी शर्त है कि कपास में नमी का अंश 12 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।
2024-25 के मार्केटिंग सीजन के दौरान महाराष्ट्र में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 6.27 लाख किसानों से लगभग 10,714 करोड़ रुपए मूल्य की 144.55 लाख क्विंटल कपास की खरीद की गई थी जो 29.41 लाख गांठ रूई के समतुल्य थी।
सीसीआई ने प्रत्येक किसान से इस बार प्रति एकड़ केवल 5 क्विंटल तक कपास खरीदने का नियम लागू किया है। इससे भी उत्पादक चिंतित हैं। इस सीमा को हटाए जाने की मांग हो रही है।
