महाराष्ट्र में कपास खरीद की गुणवत्ता शर्तों में रियायत देने की मांग

04-Nov-2025 09:09 PM

नागपुर। देश के एक अग्रणी कपास उत्पादक राज्य- ,महाराष्ट्र के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र- विदर्भ संभाग में भारी वर्षा एवं बाढ़ के कारण फसल को हुए नुकसान से किसान काफी चिंतित और परेशान हैं।

बची हुई फसल के साथ भी किसानों की कठिनाई बरकरार है क्योंकि इसमें नमी का ऊंचा अंश मौजूद है और इसलिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर इसकी सरकारी खरीद में समस्या आ रही है।

किसानों एवं शेतकरी संगठनों के नेताओं ने सरकारी एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) से कपास की खरीद के समय गुणवत्ता संबंधी नियमों- शर्तों में छूट देने का आग्रह किया है। 

उल्लेखनीय है कि सीसीआई द्वारा फिलहाल किसानों से उसी कपास की खरीद की जाती है जिसमें नमी का अंश 12 प्रतिशत से कम हो। यह केन्द्र सरकार के दिशा निर्देश के अनुरूप है। लेकिन महाराष्ट्र की हालत काफी खराब है।

लगातार होने वाली वर्षा के कारण राज्य के कई जिलों में कपास में नमी का अंश 12 से 20 प्रतिशत के बीच देखा जा रहा है जिससे किसानों को एमएसपी पर इसकी बिक्री करने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ रहा है। 

केन्द्र सरकार द्वारा 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन के लिए कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य मीडियम रेशेवाली श्रेणी का 7710 रुपए प्रति क्विंटल तथा लम्बे रेशवाली किस्मों का 8110 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।

लेकिन थोक मंडियों में कपास का भाव इससे 300-560 रुपए प्रति क्विंटल नीचे चल रहा है। सरकारी खरीद नहीं होने से किसानों को खुले बाजार में काफी कम दाम पर अपना उत्पाद बेचने के लिए विवश होना पड़ रहा है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार 2024-25 के मार्केटिंग सीजन के दौरान भारतीय कपास निगम द्वारा महाराष्ट्र में 6.27 लाख किसानों से मूल्य समर्थन योजना के तहत 10,714 करोड़ रुपए मूल्य की 144.55 लाख क्विंटल कपास की खरीद की गई जो 29.41 लाख गांठ रूई (लिंट) के समतुल्य थी।