मक्का, जौ एवं सरसों के बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी

16-Dec-2025 08:08 PM

नई दिल्ली। पिछले साल की तुलना में चालू रबी सीजन के दौरान यद्यपि मोटे अनाजों एवं तिलहनों के सकल बिजाई क्षेत्र में इजाफा हुआ है लेकिन इसमें विशेष फसलों का ही योगदान देखा जा रहा है।

मोटे अनाजों के संवर्ग में मक्का का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 14.00 लाख हेक्टेयर से 11.5 प्रतिशत बढ़कर इस बार 15.60 लाख हेक्टेयर तथा जौ का बिजाई क्षेत्र 6.47 लाख हेक्टेयर से करीब 5 प्रतिशत सुधारकर 6.78 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।

इसी तरह रागी का रकबा भी 48 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 66 हजार हेक्टेयर पर पहुंचा लेकिन ज्वार का क्षेत्रफल 20 लाख हेक्टेयर से घटकर 18.52 लाख हेक्टेयर और बाजरा का बिजाई क्षेत्र 11 हजार हेक्टेयर से फिसलकर 9 हजार हेक्टेयर रहा गया। जौ का रकबा पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल से आगे निकल गया है जबकि मक्का का रकबा 23.61 लाख हेक्टेयर के सामान्य औसत क्षेत्रफल से 8 लाख हेक्टेयर पीछे है। 

जहां तक तिलहन फसलों का सवाल है तो इसकी बिजाई में भी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इसके तहत सबसे प्रमुख तिलहन-सरसों का उत्पादन क्षेत्र तो पिछले साल के 81.16 लाख हेक्टेयर से 4 प्रतिशत या 3.51 लाख हेक्टेयर बढ़कर 84.67 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया

जो पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 79.17 लाख हेक्टेयर से भी 5.50 लाख हेक्टेयर ज्यादा है लेकिन मूंगफली का बिजाई क्षेत्र 2.57 लाख हेक्टेयर से घटकर 2.12 लाख हेक्टेयर, अलसी का क्षेत्रफल 2.27 लाख हेक्टेयर से गिरकर 1.61 लाख हेक्टेयर तथा तिल का रकबा 7 हजार हेक्टेयर से फिसलकर 5 हजार हेक्टेयर पर अटक गया।

दूसरी ओर सूरजमुखी का उत्पादन क्षेत्र 30 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 34 हजार हेक्टेयर तथा कुसुम (सैफ्लावर) का रकबा 56 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 73 हजार हेक्टेयर पर पहुंच गया। अधिकांश क्षेत्रों में रबी फसलों की बिजाई समाप्त हो चुकी है लेकिन शेष इलाकों में इसकी प्रक्रिया अगले कुछ सप्ताहों तक बरकरार रहेगी। इससे विभिन्न फसलों के क्षेत्रफल सुधर आने के आसार हैं।