मक्का का रकबा बढ़ने से अन्य फसलों की बिजाई पर असर

04-Feb-2026 08:47 PM

नई दिल्ली। संसद में प्रस्तुत आर्थिक सर्वोत्तम में इस बात पर चिंता व्यक्त की गई है कि चावल तथा शीरा के मुकाबले मक्का से निर्मित एथनॉल का बिक्री मूल्य ऊंचा रहने से इस मोटे अनाज के बिजाई क्षेत्र में तो बढ़ोत्तरी हो रही है लेकिन इससे दलहन, तिलहन तथा कपास जैसी फसलों के रकबे पर असर पड़ रहा है।

दलहनों का उत्पादन क्षेत्र घट गया है जबकि तिलहनों के बिजाई क्षेत्र में मामूली बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। इससे फसल विविधिकरण के सरकारी प्रयासों को गंभीर धक्का लगेगा और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में कठिनाई होगी। भारत पहले से ही दुनिया में दलहनों एवं खाद्य तेलों का सबसे प्रमुख आयातक देश बना हुआ है।

आर्थिक सर्वेक्षण में राष्ट्रीय स्तर पर खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा के बीच बेहतर संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। इसमें कहा गया है कि वित्त वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच मक्का से निर्मित एथनॉल के बिक्री मूल्य में 11.7 प्रतिशत का सलाना इजाफा किया गया

जो चावल तथा गन्ना अवयवों से निर्मित एथनॉल के बिक्री मूल्य से बहुत ज्यादा रहा। इससे एथनॉल निर्माण उद्योग में मक्का की मांग एवं खपत तेजी से बढ़ गई। किसानों को बेहतर लाभ हुआ और मक्का की खेती के प्रति इसका उत्साह एवं आकर्षण बढ़ गया। 

मक्का का रकबा एवं उत्पादन बढ़ना अच्छी बात है लेकिन इसके लिए दलहन-तिलहन की बिजाई एवं पैदावार प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

सरकार स्वयं इसके उत्पादन संवर्धन के लिए गंभीर प्रयास कर रही है मगर कई कारणों से उसे इसमें अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है। कपास का रकबा भी घट रहा है।