मक्का का उत्पादन बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता

30-Jan-2026 12:36 PM

नई दिल्ली। कृषि अर्थव्यवस्था की दृष्टि से दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल भारत में अभी तक मुख्यतः खाद्यान्न के संवर्ग में धान और गेहूं की खेती पर ही जोर दिया जाता रहा है ताकि आंतरिक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

इन दोनों खाद्यान्न के उत्पादन की लगभग पूरी क्षमता अब हासिल की जा चुकी है और देश में बाहर से इसे मंगाने की जरूरत नहीं पड़ रही है।

भारत संसार में चावल का सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश बन गया है जबकि गेहूं के उत्पादन में चीन के बाद दूसरे नम्बर पर है।

अब तीसरे सबसे प्रमुख अनाज-मक्का का उत्पादन तेजी से बढ़ाए जाने की आवश्यकता है क्योंकि विभिन्न उद्देश्यों एवं क्षेत्रों में इसकी मांग एवं खपत लगातार बढ़ती जा रही है।

इस मांग को पूरा करना भविष्य में कठिन हो सकता है। धान एवं गेहूं की तुलना में मक्का की फसल को सिंचाई के लिए कम पानी की जरूरत पड़ती है। 

दिलचस्प तथ्य यह है कि बिजाई क्षेत्र की दृष्टि से भारत दुनिया में चीन, अमरीका और ब्राजील के बाद मक्का का चौथा सबसे प्रमुख उत्पादक देश है जबकि उत्पादन में पांचवें नम्बर पर रहता है।

उपरोक्त तीन देशों के साथ-साथ अर्जेन्टीना में भी भारत से ज्यादा मक्का का उत्पादन होता है। भारत में मक्का की बिजाई तो विशाल क्षेत्रफल में होती है मगर इसकी औसत उपज दर काफी नीचे रहती है जिससे अपेक्षित उत्पादन प्राप्त नहीं हो पाता है।

भारत में मक्का की औसत उपज दर 3.60 लाख टन प्रति हेक्टेयर रहती है जो वैश्विक औसत 4.90 टन प्रति हेक्टेयर से काफी कम है। हाल के वर्षों में उपज दर में कुछ सुधार आया है लेकिन इसमें निरन्तर बढ़ोत्तरी करने की जरूरत है।

भारत में खाद्य उद्देश्य के साथ-साथ पशु आहार, पॉल्ट्री फीड, स्टार्च निर्माण एवं एथनॉल आदि उद्योग में मक्का की खपत बड़े पैमाने पर हो रही है।

इसकी मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ाना आवश्यक है। मक्का का घरेलू उत्पादन इस बार 450 लाख टन पहुंचने का अनुमान है जबकि इसमें निरन्तर वृद्धि की जरूरत है।