मक्का के वार्षिक आयात में 6 गुणा की जबरदस्त बढ़ोत्तरी

16-Jul-2025 03:07 PM

नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान देश में केवल 1.37 लाख टन मक्का का आयात हुआ था जो 2024-25 में करीब 6 गुणा उछलकर 9.70 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसके साथ ही भारत मक्का का एक विशुद्ध आयातक देश बन गया जबकि पहले इसका एक महत्वपूर्ण निर्यातक देश बना हुआ था।

घरेलू प्रभाग में मक्का की मांग एवं खपत में जोरदार बढ़ोत्तरी दर्ज की गई क्योंकि पशु आहार, पॉल्ट्री फीड एवं स्टार्च निर्माण जैसे परम्परागत खपतकर्ता उद्योगों के साथ-साथ एथनॉल निर्माण उद्योग में भी इसका उपयोग तेजी से बढ़ गया।

यद्यपि सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि 2024-25 सीजन के दौरान देश में मक्का का उत्पादन बढ़कर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया लेकिन फिर भी विदेशों से इसके विशाल आयात की आवश्यकता पड़ गई। 

घरेलू मांग एवं खपत के साथ-साथ कीमतों में भी वृद्धि होने से मक्का का निर्यात काफी हद तक प्रभावित हुआ और समीक्षाधीन वित्त वर्ष के दौरान इसका कुल शिपमेंट 14.42 लाख टन से लुढ़ककर 5.56 लाख टन पर अटक गया।

इस तरह निर्यात में 61 प्रतिशत की जोरदार गिरावट दर्ज की गई। ध्यान देने की बात है कि वर्ष 2022-23 के दौरान देश से 34.53 लाख टन मक्का का शानदार निर्यात हुआ था। मात्रा घटने के कारण मक्का की निर्यात आय में भी जोरदार गिरावट आ गई और यह 2022-23 के 1.11 अरब डॉलर से लुढ़ककर 2024-25 में  महज 20.10 करोड़ डॉलर पर सिमट गई। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के तीसरे अंतिम अनुमान के अनुसार 2024-25 के सीजन में मक्का का घरेलू उत्पादन तेजी से बढ़कर 422.81 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया पिछले 10 वर्षों के दौरान इसमें लगभग दोगुनी बढ़ोत्तरी हो गई। 15-16 में 225.67 लाख टन मक्का का उत्पादन हुआ था।   

उद्योग-व्यापार समीक्षकों ने 2024-25 के सीजन में 7.70 लाख टन मक्का के आयात का अनुमान लगाया था जबकि वास्तविक आयात इससे 2 लाख टन अधिक हुआ। भारत पहले एशिया का सबसे प्रमुख निर्यातक देश बना हुआ था मगर 2024-25 में यहां निर्यात से ज्यादा मक्का का आयात हो गया।

आगे भी स्थिति में ज्यादा बदलाव होने की संभावना कम है। वैसे एथनॉल निर्माण में रियायती मूल्य वाले सरकारी चावल का उपयोग बढ़ने से मक्का पर दबाव कम हुआ है और खरीफ सीजन में इस महत्वपूर्ण मोटे अनाज के बिजाई क्षेत्र में बढ़ोत्तरी होने के संकेत भी मिल रहे हैं।