मक्का और जौ का रकबा बढ़ने के आसार
15-Dec-2025 09:01 PM
नई दिल्ली। हालांकि खरीफ सीजन के नए माल की जोरदार आवक होने तथा एथनॉल, स्टार्च एवं पॉल्ट्री फीड उद्योग की मांग कमजोर रहने से मक्का का थोक मंडी भाव घटकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (2400 रुपए प्रति क्विंटल) से काफी नीचे आ गया है लेकिन फिर भी रबी कालीन मक्का की बिजाई में किसानों का उत्साह एवं आकर्षण बरकरार है।
यह सही है कि खरीफ सीजन की तुलना में रबी सीजन के दौरान देश में मक्का की खेती काफी कम क्षेत्रफल में होती है लेकिन फिर भी कुल राष्ट्रीय वार्षिक उत्पादन में इसका बढ़िया योगदान रहता हैं। उत्पादकों को भरोसा है कि देर-सवेर मक्का में अच्छी औद्योगिक मांग निकलेगी और तब कीमतों में भी सुधार आएगा।
जहां तक जौ का सवाल है तो यह रबी सीजन का खास मोटा अनाज है और अक्सर इसकी मांग मजबूत रहती है। राजस्थान के किसानों को पिछले सीजन में उत्पादिंत जौ का आकर्षण एवं लाभप्रद मूल्य प्राप्त हुआ और इसलिए वे इसकी बिजाई में अच्छी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
आमतौर पर जौ का थोक मंडी भाव सरकारी समर्थन मूल्य से ऊंचा रहता है। राजस्थान इसका सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त है और वहां इस बार इस महत्वपूर्ण मोटे अनाज की खेती के लिए तमाम परिस्थितियां अनुकूल हैं। बिजाई क्षेत्र में बढ़ोत्तरी होने पर जौ का उत्पादन बढ़ सकता है जिससे किसानों की आमदनी में भी अच्छी बढ़ोत्तरी होगी।
