मक्का तथा स्मॉल मिलेट्स के बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी

07-Oct-2025 08:33 PM

नई दिल्ली। खरीफ कालीन फसलों की बिजाई का अभियान समाप्त होने का बाद जो नया आंकड़ा सामने आया है उससे संकेत मिलता है कि मोटे अनाजों के संवर्ग में इस बार भारतीय किसानों ने उम्मीद के अनुरूप मक्का की खेती में जबरदस्त उत्साह दिखाया है।

इसके साथ-साथ स्मॉल मिलेट्स का भी रकबा बढ़ा है। दूसरी ओर ज्वार, बाजरा और रागी का क्षेत्रफल गत वर्ष से कुछ पीछे रह गया। कुछ राज्यों में भारी वर्षा एवं भयंकर बाढ़ से मोटे अनाजों की फसलों को आंशिक क्षति होने की सूचना भी मिल रही है। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की तुलना में इस बार खरीफ कालीन मोटे अनाजों का घरेलू उत्पादन क्षेत्र 183.54 लाख हेक्टेयर से 11.13 लाख हेक्टेयर बढ़कर 194.67 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 180.71 लाख हेक्टेयर से करीब 14 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। यह 3 ऑटोबेर 2025 तक का आंकड़ा है। 

गत वर्ष की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान यद्यपि ज्वार का क्षेत्रफल 14.21 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 14.07 लाख हेक्टेयर। बाजरा का बिजाई क्षेत्र 68.65 लाख हेक्टेयर से घटकर 68.44 लाख हेक्टेयर तथा रागी का रकबा 11.96 लाख हेक्टेयर से गिरकर 11.81 लाख हेक्टेयर रह गया

लेकिन दूसरी ओर मक्का का उत्पादन क्षेत्र 84.30 लाख हेक्टेयर से 10.65 लाख हेक्टेयर उछलकर 94.95 लाख हेक्टेयर के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया जो पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल  78.95 लाख हेक्टेयर से 16 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। अन्य स्मॉल मिलेट्स का रकबा 4.42 लाख हेक्टेयर ज्यादा है।

मक्का की बिजाई में जोरदार बढ़ोत्तरी होने का अनुमान पहले से ही लगाया जा रहा था क्योंकि इसकी घरेलू मांग एवं कीमत काफी मजबूत बनी हुई है और किसानों को इससे आकर्षक आमदनी भी प्राप्त हो रही है।

इक्का-दुक्का प्रांतों को छोड़कर अन्य सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों में इस बार मक्का के बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है जिसमें महाराष्ट्र भी शामिल है।

वहां मक्का की वजह से किसानों ने सोयाबीन तथा कपास का रकबा घटा दिया। वैसे महाराष्ट्र एवं राजस्थान जैसे प्रांतों में भारी वर्षा एवं खेतों में जल भराव के कारण मोटे अनाजों की फसल प्रभावित हुई है लेकिन फिर भी राष्ट्रीय स्तर पर खासकर मक्का का शानदार उत्पादन होने का अनुमान है।