मोटे अनाजों का रकबा 5 प्रतिशत बढ़कर 58.72 लाख हेक्टेयर पहुंचा

21-Jan-2026 02:23 PM

नई दिल्ली। रबीकालीन मोटे अनाजों/श्री अन्न के संवर्ग में पिछले साल के मुकाबले इस बार ज्वार को छोड़कर अन्य फसलों के बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है। हालांकि सरकार ने ज्वार के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में भी अच्छी वृद्धि की है लेकिन प्रमुख उत्पादक प्रान्तों में किसानों द्वारा गेहूं, चना एवं सरसों जैसे फसलों की खेती को विशेष प्राथमिकता दी जाने के कारण इसके बिजाई क्षत्र में कमी आ गयी। दूसरी ओर मक्का, जौ तथा रागी का रकबा बढ़ गया।

आधिकारिक आकड़ों के अनुसार मौजूदा रबी सीजन के दौरान मोटे अनाजों का कुल उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 58.72 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो पिछले साल के बिजाई क्षेत्र 55.93 लाख हेक्टेयर से 5 प्रतिशत अधिक रहा। इसके तहत ज्वार का उत्पादन क्षेत्र तो 23.85 लाख हेक्टेयर से 5.5 प्रतिशत घटकर 22.54 लाख हेक्टेयर रह गया जबकि रागी का रकबा 70 हजार हेक्टेयर से करीब 39 प्रतिशत उछलकर 97 हजार हेक्टेयर, जौ का बिजाई क्षेत्र 6.08 लाख हेक्टेयर से 21.2 प्रतिशत बढ़कर 7.37 लाख हेक्टेयर तथा मक्का का क्षेत्रफल 25.05 लाख हेक्टेयर से 10 प्रतिशत सुधरकर 27.55 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। बाजार का रकबा गत वर्ष के लगभग बराबर ही रहा।

केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने 2025-26 के मौजूदा रबी सीजन के लिए 145 लाख टन मक्का, 31.7 लाख टन पोषक अना (ज्वार-बाजरा एवं रागी आदि) तथा 20.5 लाख टन जौ के उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है और उसे यह लक्ष्य हासिल हो जाने का भरोसा भी है। आमतौर पर सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों में फसल की हालत सामान्य (संतोषजनक) बताई जा रही है। रबी सीजन के दौरान बिहार में मक्का, राजस्थान में जौ तथा महाराष्ट्र में में ज्वार का सर्वाधिक उत्पादन होता है। नई फसल की कटाई-तैयारी मार्च-अप्रैल में होगी और बेहतर उत्पादन के लिए अगले कुछ सप्ताहों तक मौसम का अनुकूल रहना आवश्यक है। मक्का की घरेलू मांग एवं खपत में निरंतर इजाफा होता जा रहा है।