मध्य प्रदेश सरकार एमएसपी पर धान तथा गेहूं खरीदने को तैयार नहीं
03-Nov-2025 03:03 PM
भोपाल। कर्ज के लगातार बढ़ते बोझ को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार 2025-26 के सीजन में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान और गेहूं की खरीद के लिए तैयार नहीं है। उसने केंद्र को पत्र भेजकर इस बारे में सूचित कर दिया है। पत्र में कहा गया है कि राज्य के नागरिक आपूर्ति निगम पर 77,000 करोड़ रुपए का भारी-भरकम कर्ज चढ़ा हुआ है इसलिए केंद्र सरकार को स्वयं ही दोनों प्रमुख खाद्यान्न की खरीद करनी चाहिए।
समझा जाता है कि अगर केंद्र इस प्रस्ताव या आग्रह को स्वीकार कर लेता है तो धान और गेहूं की खरीद में मध्य प्रदेश के नागरिक आपूर्ति निगम की भूमिका समाप्त हो जाएगी। उल्लेखनीय है की मध्य प्रदेश में खाद्यान्न खरीद की विकेंद्रीकृत व्यवस्था लागु होने से राज्य सरकार पहले अपनी एजेंसियों के माध्यम से किसानों से एमएसपी पर खाद्यान्न की खरीद करती है और फिर केंद्रीय एजेंसी-भारतीय खाद्य निगम द्वारा इसका उठाव किया जाता है। लेकिन इस बार अगर मध्य प्रदेश सरकार खरीद में भाग नहीं लेती है तो खाद्य निगम को इसकी खरीद के लिए सीधे मंडियों में सक्रिय होना पड़ेगा।
समीक्षकों का कहना है कि एजेंसियों के बदलाव से किसानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि उसे हर हाल में समर्थन मूल्य अवश्य मिलेगा लेकिन खरीद की प्रक्रिया में थोड़ी दिक्कत हो सकती है क्योंकि एफसीआई का गुणवत्ता सम्बन्धी नियम काफी सरल है और इससे किसानों को अपने उत्पाद के रिजेक्ट होने की आशंका बनी रहेगी। सरकारी खरीद में बाधा पड़ने पर किसानों को खुले बाजार में सस्ते दाम पर व्यापारियों के हाथों अपना उत्पाद बेचने के लिए विवश होना पड़ सकता है। केंद्र द्वारा सही समय पर बकाए का भुगतान नहीं किए जाने से राज्य आपूर्ति निगम पर बैंक से लिए गए ऋण की राशि बढ़कर 72,177 करोड़ रुपए पर पहुंच गयी है जिस पर भारी-भरकम ब्याज चुकाना पड़ रहा है। मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में खाद्यान्न खरीद के लिए केंद्रीकृत प्रणाली लागू करने का आग्रह किया है और पिछले बकाए का भुगतान भी जल्दी से जल्दी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
