मध्यवर्ती एवं दक्षिणी राज्यों में अधिशेष तथा नौ प्रांतों में सामान्य से कम वर्षा
06-Aug-2024 06:10 PM
नई दिल्ली (भारती एग्री एप्प)। दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के प्रथम माह यानी जून 2024 में राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य औसत से 11 प्रतिशत कम बारिश हुई लेकिन जुलाई में वर्षा की हालत बेहतर रही और अब अगस्त में भी देश के अनेक राज्यों में भारी बारिश हो रही है।
विगत वर्षों की भांति इस बार भी मानसूनी वर्षा का वितरण असमान देखा जा रहा है। इसके तहत देश के मध्यवर्ती तथा दक्षिणी भाग में सामान्य औसत से ज्यादा (अधिशेष) वर्षा हुई है मगर पचिमोत्तर भारत और पूर्वी प्रांतों में बारिश कम होने की खबर है। बांधों-जलाशयों में पानी का स्तर भी अलग-अलग देखा जा रहा है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार देश के मध्यवर्ती भाग में जून माह के दौरान 13 प्रतिशत कम बारिश हुई थी मगर अब 21 प्रतिशत अधिक वर्षा हो चुकी है।
इसी तरह दक्षिणी भारत में 24 प्रतिशत अधिशेष बारिश हो चुकी है। भारी बारिश के कारण इन दोनों संभागों के अनेक इलाकों में भयंकर बाढ़ आ गई जिससे खरीफ फसलों को नुकसान हो रहा है।
महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं केरल जैसे राज्यों के कई जिलों में आई विनाशकारी बाढ़ से जन जीवन अस्त-व्यस्त हो गया। केरल के वायनाड जिले में जबरदस्त त्रासदी देखी गई। राष्ट्रीय स्तर पर 1 जून से 5 अगस्त के बीच दीर्घकालीन औसत (एलपीए) के मुकाबले 7 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई।
ला नीना मौसम चक्र के लिए परिस्थितियां अनुकूल होती जा रही हैं जिससे मानसून को मजबूत सहारा मिलने की उम्मीद है। इसके फलस्वरूप इन क्षेत्रों में भी भारी वर्षा होने का अनुमान लगाया जा रहा है जहां अब तक इसका अभाव महसूस किया जा रहा था।
देश के पश्चिमोत्तर प्रांतों में अब तक सामान्य से कम बारिश हुई है। यह स्थिति पूर्वी एवं पूर्वोत्तर राज्यों की भी है। सामान्य औसत के मुकाबले पश्चिमोत्तर राज्यों में 8 प्रतिशत तथा देश के पूर्वी एवं पूर्वोत्तर प्रांतों में 13 प्रतिशत कम बारिश होने की सूचना मिल रही है।
जून में तो उत्तरी-पश्चिमी राज्यों में वर्षा की कमी 33 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। मौसम विभाग के मुताबिक चालू मानसून सीजन के दौरान अब तक 12 राज्यों में सामान्य से अधिक तथा नौ प्रांतों में सामान्य से कम वर्षा हुई है।
सामान्य से कम बारिश वाले प्रमुख राज्यों में झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब तथा हरियाणा आदि शामिल है जहां धान एवं मक्का सहित कई अन्य खरीफ फसलों की खेती बड़े पैमाने पर होती है।
