नए माल की आपूर्ति बढ़ने से मक्का के दाम में नरमी

05-Nov-2025 10:37 AM

हैदराबाद। रिकॉर्ड उत्पादन की संभावना, नए माल की तेजी से बढ़ती आवक तथा एथनॉल उद्योग की कमजोर मांग के कारण देश की प्रमुख मंडियों में मक्का का भाव घटकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के नीचे आ गया है। पॉल्ट्री फीड निर्माण में भी मक्का का उपयोग कम हो रहा है। 

उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार ने मक्का का एमएसपी 2024-25 सीजन के 2225 रुपए प्रति क्विंटल से 175 रुपए बढ़ाकर 2025-26 के सीजन हेतु 2400 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है जबकि नमी की मात्रा एवं क्वालिटी के आधार पर विभिन्न उत्पादक राज्यों की थोक मंडियों में इसका भाव फिलहाल 1300 से 2100 रुपए प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है।

यह मॉडल मूल्य है और इस पर ही मंडियों में अधिकांश कारोबार हो रहा है। थोक मंडी भाव लुढ़कने से चिंतित उत्पादक अब सरकार से एमएसपी पर मक्का की खरीद शुरू करने की जोरदार मांग कर रहे हैं

क्योंकि उन्हें औने-पौने दाम पर अपना उत्पाद बेचने के लिए विवश होना पड़ रहा है। किसानों की कठिनाई को देखते हुए तेलंगाना सरकार ने एमएसपी पर मक्का खरीदना शुरू कर दिया है और करीब 8 लाख  टन की खरीद का प्लान बनाया है। 

ध्यान देने की बात है कि बेहतर आमदनी प्राप्त होने की उम्मीद से खरीफ सीजन में किसानों ने मक्का की खेती में जबरदस्त उत्साह दिखाया जिससे राष्ट्रीय  स्तर पर इसका बिजाई क्षेत्र गत वर्ष के 84.30 लाख हेक्टेयर से 10.60 लाख हेक्टेयर उछलकर इस बार 94.90 लाख हेक्टेयर के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया।

हालांकि कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश एवं बाढ़ से फसल को क्षति होने की सूचना मिली थी लेकिन इसके बावजूद चालू वर्ष के दौरान इस महत्वपूर्ण मोटे अनाज का उत्पादन नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के आसार हैं।

एथनॉल निर्माण उद्योग में मक्का की मांग कमजोर पड़ गई है क्योंकि उसे अभी चावल तथा गन्ना का आसान विकल्प प्राप्त हो रहा है। आई ग्रेन इंडिया के डायरेक्टर राहुल चौहान के अनुसार केन्द्र सरकार ने 2025-26 सीजन के लिए एथनॉल निर्माताओं को 52 लाख टन चावल का कोटा आवंटित किया है।

उधर डिस्टीलर्स ड्राईड ग्रेन्स विद सोल्यूबल्स (डीडीजीएस) की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ने से पॉल्ट्री उद्योग में मक्का की मांग प्रभावित होने लगी है। अनाज आधारित एथनॉल निर्माण के दौरान डीडीजीएस का उत्पादन होता है।

राहुल चौहान का कहना है कि यद्यपि अत्यधिक एवं असामयिक वर्षा होने से देश के कई इलाकों में खरीफ कालीन फसलें क्षतिग्रस्त हो गई लेकिन फिर भी मक्का का उत्पादन पिछले साल से अधिक होने की प्रबल संभावना है।