निस्तारित वर्षा से खरीफ फसलों को नुकसान के कारण किसानों की बढ़ी कठिनाई

06-Nov-2025 10:39 AM

मुम्बई। दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता देर तक बरकरार रहने तथा सितम्बर-अक्टूबर में फसल पकने और कटने के समय भी बारिश का प्रकोप होने से देश के विभिन्न राज्यों में खरीफ फसलों को नुकसान हुआ है।

इससे ग्रामीण क्षेत्र की अर्थ व्यवस्था कमजोर पड़ने की आशंका है। हाल ही में आए मोंथा समुद्री चक्रवाती तूफान से आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना जैसे राज्यों में तेज हवा के साथ मूसलाधार बारिश होने से भी फसलों को क्षति हुई।

महाराष्ट्र, तमिलनाडु एवं गुजरात सहित कुछ अन्य राज्यों में अक्टूबर माह के दौरान हुई भारी वर्षा ने किसानों की मुसीबत को और भी बढ़ा दिया।

ग्रामीण क्षेत्र की अर्थ व्यवस्था कमजोर पड़ने तथा किसानों की क्रय शक्ति घटने में तेजी से उभरते उपभोक्ता उत्पादों (एफएमसीजी) की मांग एवं खपत आंशिक रूप से प्रभावित होने की संभावना है। 

उद्योग-व्यापार क्षेत्र के विश्लेषकों का कहना है कि जोरदार वर्षा एवं खेतों में जल भराव के कारण फसलों को हुए नुकसान को न तो नजरअंदाज किया जा सकता है और न ही कम करके आंका जाना चाहिए।

इसके अलावा दलहन-तिलहन के प्रमुख उत्पादक राज्यों में सरकारी खरीद भी बहुत देर से शुरू हुई और तब तक किसानों को काफी कम दाम पर अपना उत्पाद बेचने के लिए विवश होना पड़ा।

दलहन फसलों में मूंग, उड़द एवं तुवर तथा तिलहन फसलों में सोयाबीन, मूंगफली तथा तिल की फसल पर प्राकृतिक प्रतिकूल असर पड़ा है। पंजाब, राजस्थान एवं तेलंगाना जैसे प्रांतों में सितम्बर तक बाढ़ का प्रकोप बरकरार रहा। राजस्थान में मूंग की फसल आहत हुई है।

एफएमसीजी कंपनियों को अपनी व्यापारिक रणनीति में कुछ बदलाव करना पड़ेगा ताकि ग्रामीण क्षेत्र में इसके कारोबार में आने वाली गिरावट की भरपाई के लिए वैकल्पिक उपाय किए जा सकें।

फसलों को हुई क्षति के साथ-साथ कई क्षेत्रों में उत्पादों की क्वालिटी पर भी असर पड़ा है इसलिए बेहतर गुणवत्ता वाले माल की आपूर्ति एवं उपलब्धता में कमी आ सकती है और इसका असर उत्पादों के लागत खर्च पर पड़ने की संभावना है।