नेशनल सैफ्रॉन मिशन की लांचिंग के बावजूद केसर का उत्पादन निराशाजनक
27-Jan-2026 09:22 PM
पुलवामा। केन्द्र सरकार ने सिंचाई की सुविधा का विस्तार करने तथा नई कृषि तकनीक को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केसर का उत्पादन बढ़ाने हेतु वित्त वर्ष 2010-11 में 400.11 करोड़ रुपए के बजट के साथ नेशनल सैफ्रॉन मिशन की लांचिंग की थी
लेकिन अफसोस की बात है कि 15 साल बीतने के बाद भी न तो जम्मू-कश्मीर के उत्पादक इलाकों में सिंचाई के साधनों का अभाव खत्म हो सका और न ही उत्पादकों को नई उत्पादन पद्धति (तकनीक) अपनाने का समुचित प्रोत्साहन दिया जा सका। नतीजा यह हुआ कि जम्मू कश्मीर में केसर का उत्पादन 2010-11 के 15 टन से लुढ़ककर हाल के वर्षों में 1 से 4 टन के बीच अटक गया।
उत्पादकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से जम्मू कश्मीर के केसर उत्पादक क्षेत्रों में शीतकाल के दौरान लम्बे समय तक वर्षा नहीं या नगण्य होती है।
सरकार द्वारा उत्पादकों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध करवाने का भरोसा तो दिया गया लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
दूसरी ओर सरकारी अधिकारियों ने दावा किया है कि कार्यक्रम के अंतर्गत 2598 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की सुविधा पहुंचाकर उसे पुनर्जीवित किया गया है।
लेकिन किसानों का कहना है कि यदि यह दावा सही है तो केसर का उत्पादन बढ़ना चाहिए था जबकि हकीकत यह है कि उत्पादन में लगातार गिरावट आ रही है।
आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि देश के एक मात्रा परम्परागत केसर उत्पादक राज्य जम्मू-कश्मीर में 2010-11 के सीजन में करीब 8 टन (8000 किलो) केसर का उत्पादन हुआ था जो 2023-24 के सीजन तक आते-आते 67.5 प्रतिशत घटकर 2.60 टन (2600 किलो) पर आ गया
वैसे 2022-23 सीजन के मुकाबले 2023-24 सीजन के दौरान केसर के उत्पादन में करीब 4 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। सरकारी आंकड़े स्वयं आधिकारिक दावों की पोल खोल रहे हैं।
