नवम्बर में कृषि एवं खाद्य उत्पादों की निर्यात आय में उतार-चढ़ाव
16-Dec-2025 04:34 PM
नई दिल्ली। केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि नवम्बर 2024 के मुकाबले नवम्बर 2025 के दौरान भारतीय चावल की निर्यात आमदनी में लगभग 30 प्रतिशत की जोरदार गिरावट आ गई तथा मूंगफली सहित अन्य तिलहनों के निर्यात से भी आमदनी कम हुई
लेकिन दूसरी ओर चाय, कॉफी, मसाले, काजू तथा ऑयल मील आदि की निर्यात आय में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। समीक्षाधीन अवधि के दौरान देश में चांदी, रूई, कॉटन बेस्ट, दलहन, फलों, एवं सब्जियों का आयात बढ़ गया लेकिन खाद्य तेलों, पेट्रोलियम तथा सोना आदि के आयात खर्च में गिरावट दर्ज की गई।
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक नवम्बर 2024 में चावल के निर्यात से 1.10 अरब डॉलर की आमदनी हुई थी जो नवम्बर 2025 में घटकर 79.19 करोड़ डॉलर रह गई। दूसरी ओर मसालों के निर्यात आय करीब 13 प्रतिशत बढ़कर 35.846 करोड़ डॉलर तथा कॉफी की निर्यात आय 34 प्रतिशत उछलकर 13.48 करोड़ डॉलर पर पहुंच गई।
डेयरी उत्पादों के निर्यात में भी इजाफा हुआ मगर तिलहनों की निर्यात आमदनी 2 प्रतिशत फिसलकर 11.40 करोड़ डॉलर पर सिमट गई। प्रसंस्कृत काजू कर्नेल एवं ऑयल मील के निर्यात से अच्छी आमदनी प्राप्त हुई।
सीमा शुल्क स्थगित होने तथा वैश्विक बाजार भाव नरम रहने के बावजूद नवम्बर में रूई तथा कॉटन वेस्ट (अवशिष्ट कपास) के आयात पर होने वाला खर्च 75.3 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि के साथ 29.94 करोड़ डॉलर पर पहुंच गया जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि इसकी आयात मात्रा में भारी बढ़ोत्तरी हुई।
इसी तरह नवम्बर 2025 में दलहनों के आयात पर होने वाला खर्च भी 1.1 प्रतिशत सुधरकर 49.44 करोड़ डॉलर हो गया। ज्ञात हो कि नवम्बर से ही पीली मटर पर 30 प्रतिशत का आयात शुल्क लागू हुआ जबकि देसी चना एवं मसूर पर 10-10 प्रतिशत का सीमा शुल्क पहले से ही प्रभावी था।
उड़द एवं तुवर पर कोई आयात शुल्क नहीं लगता है। नवम्बर में खाद्य तेलों का आयात खर्च करीब 20 प्रतिशत घटकर 1.50 अरब डॉलर पर सिमट गया।
