नवम्बर में खाद्य तेलों का आयात कम होने से स्टॉक में गिरावट
18-Dec-2025 08:37 PM
मुम्बई। स्वदेशी वनस्पति तेल उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र के एक अग्रणी संगठन सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चलता है कि नवम्बर 2024 की तुलना में नवम्बर 2025 के दौरान खाद्य तेलों का आयात 28 प्रतिशत से लुढ़ककर 11.84 लाख टन पर सिमट गया।
इसके तहत खासकर आरबीडी पामोलीन के आयात में जबरदस्त गिरावट आई और लगभग सम्पूर्ण आयात क्रूड खाद्य तेलों का ही हुआ। स्वदेशी उद्योग के लिए यह एक अच्छा संकेत है। समीक्षाधीन अवधि के दौरान क्रूड पाम तेल (सीपीओ) का आयात कुछ बढ़ गया मगर क्रूड सोया तेल और क्रूड सूरजमुखी तेल के आयात में गिरावट दर्ज की गई।
आयात में भारी कमी आने के कारण 1 दिसम्बर 2025 को भारतीय बंदरगाहों पर तथा पाइप लाइन में खाद्य तेलों का कुल स्टॉक घटकर 16.23 लाख टन रह गया जो नवम्बर के आरंभ में उपलब्ध स्टॉक से कम था।
आयात की इस प्रवृत्ती से पता चलता है कि सरकार की नीति कारगर साबित हो रही है और स्वदेशी रिफाइनिंग उद्योग को प्रोत्साहित करने हेतु उसने शुल्कान्तर में वृद्धि का जो उपाय लागू किया उसका सार्थक परिणाम अब सामने आने लगा है।
रबी कालीन तिलहन फसलों के तहत खासकर सरसों की बिजाई संतोषजनक ढंग से जारी है और इसका क्षेत्रफल गत वर्ष से ही नहीं बल्कि सामान्य (पंचवर्षीय) औसत क्षेत्रफल से भी आगे चल रहा है।
कई इलाकों में रबी सीजन की इस सबसे महत्वपूर्ण तिलहन फसल की बिजाई अभी जारी है लेकिन मध्य प्रदेश में इसका रकबा पिछड़ने की संभावना है।
अन्य रबी तिलहनों की बिजाई में मिश्रित रुख देखा जा रहा है। इसके तहत मूंगफली एवं अलसी के उत्पादन क्षेत्र में गिरावट आई है जबकि सूरजमुखी एवं कुसुम (सैफ्लावर) के बिजाई क्षेत्र में वृद्धि हुई है।
