ओएमएसएस वाले गेहूं की खरीद में मिलर्स-प्रोसेसर्स की दिलचस्पी कम
22-Jan-2026 01:21 PM
नई दिल्ली। प्राइवेट क्षेत्र के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद रहने तथा बाजार भाव लगभग स्थिर होने के कारण सरकारी गेहूं की खरीद में मिलर्स- प्रोसेसर्स द्वारा ज्यादा दिलचस्पी या सक्रियता नहीं दिखाई जा रही है।
खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के अंतर्गत भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा गेहूं की दोबारा नीलामी बिक्री शुरू की गई लेकिन इसके प्रति कोई खास रिस्पांस नहीं दिखाया जा रहा है।
चालू वित्त वर्ष के लिए ओएमएसएस के तहत खाद्य मंत्रालय ने 30 लाख टन गेहूं की बिक्री को कोटा आवंटित किया है जिसमें से अब तक केवल 3.50 लाख टन की ही बिक्री संभव हो सकी है। गेहूं की नीलामी की प्रक्रिया 31 मार्च 2026 तक जारी रहने की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि खाद्य निगम द्वारा इस बार काफी देरी से ओएमएसएस आरंभ किया गया। इसकी शुरुआत नवम्बर 2025 में हुई।
नवम्बर में सरकारी गेहूं की बिक्री के लिए दो बार साप्ताहिक नीलामी आयोजित की गई लेकिन सीमित मात्रा में हुई बिक्री को देखते हुए बाद में उसे स्थगित कर दिया गया। दिसम्बर में एक बार नीलामी आयोजित हुई और अब जनवरी में इसे दोबारा आरंभ किया गया।
व्यापार विश्लेषकों के अनुसार ओएमएसएस के अंतर्गत सरकारी गेहूं की बिक्री के लिए साप्ताहिक (या साक्षिक) ई-नीलामी की प्रक्रिया मार्च 2026 के दूसरे सप्ताह तक जारी रहने की संभावना है लेकिन इसमें फ्लोर मिलर्स एवं प्रोसेसर्स द्वारा जोरदार सक्रियता दिखाए जाने की उम्मीद नहीं है।
प्रमुख उत्पादक राज्यों की थोक मंडियों में सीमित उतार-चढ़ाव के साथ गेहूं का भाव लगभग स्थिर बना हुआ है और इसका अच्छा खासा स्टॉक भी मौजूद है।
सीमा का आदेश लागू है। सरकारी गेहूं का न्यूनतम आरक्षित मूल्य (रिजर्व प्राइस) 2550 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है जबकि इस पर किराया भाड़ा अलग से लागू होगा। ऐसी हालत में सीमित राज्यों के मिलर्स- प्रोसेसर्स ही गेहूं की खरीद में रुचि दिखा सकते हैं।
अधिकारियों का मानना है कि 2025-26 के मौजूदा वित्त वर्ष में 30 लाख टन के आवंटित स्टॉक में से खाद्य निगम को करीब 10-12 लाख टन गेहूं बेचने का मौका मिल सकता है।
