ऑयल मील का निर्यात प्रदर्शन कमजोर रहने की संभावना
21-Apr-2026 05:54 PM
मुम्बई। कुछ विशेष कारणों से चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत से ऑयल मील का निर्यात प्रदर्शन कमजोर रहने की संभावना है। सोयाबीन का प्लांट डिलीवरी मूल्य बढ़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी ऊपर पहुंच गया है जिससे सोया तेल एवं सोयामील के लागत खर्च में बढ़ोत्तरी हो गई है और सोया डीओसी का निर्यात ऑफर मूल्य ऊंचा हो गया है। रेपसीड मील का निर्यात काफी हद तक चीन की मांग पर निर्भर है।
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 (अप्रैल-मार्च) के दौरान भारत से ऑयल मील का सकल निर्यात बढ़कर 45 लाख टन के करीब पहुंच गया था। इसमें से लगभग 65 प्रतिशत का निर्यात दक्षिण-पूर्व, सुदूर पूर्व एवं दक्षिण एशिया के देशों को हुआ जबकि मध्य पूर्व के देशों को करीब 20 प्रतिशत तथा यूरोपीय देशों को 15 प्रतिशत का शिपमेंट किया गया।
इस वर्ष मध्य पूर्व एवं पश्चिम एशिया में संकटपूर्ण स्थिति बरकरार है और कोई नहीं जानता है कि यह कब तक कायम रहेगी। तेल-गैस का दाम बढ़ने से जहाजों के किराया भाड़ा एवं बीमा खर्च में इजाफा हो गया है और पश्चिम एशिया के देशों में ऑयल मील भेजना कठिन हो सकता है। यूरोपीय देशों को भी शिपमेंट में कठिनाई होगी।
दक्षिण-पूर्व एशिया के देश अर्जेन्टीना, ब्राजील एवं अमरीका जैसे देशों से सोया मील का आयात बढ़ा सकते हैं। भारतीय सोया मील का निर्यात ऑफर मूल्य कुछ हद तक गैर प्रतिस्पर्धी हो गया है। वैसे अमरीका तथा लैटिन अमरीकी देशों से दक्षिण-पूर्व एशिया तक सोयामील का निर्यात करना भी खर्चीला साबित हो सकता है।
भारतीय निर्यातकों को न केवल मौजूदा मार्केट में अपनी स्थिति मजबूत करने की जरूरत है बल्कि नए-नए वैकल्पिक बाजारों की तलाश के लिए भी गंभीर प्रयास करने की जरूरत है। जुलाई 2026 में भारतीय निर्यातकों का एक दल सुदूर-पूर्व एशिया के दौरे पर जाने वाला है।
