पीडीएस खाद्यान्न के लीकेज से विशाल धनराशि के नुकसान से खाद्य मंत्रालय का इंकार

20-Nov-2024 04:33 PM

नई दिल्ली । हाल में एक संस्था द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन रिपोर्ट में कहा है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के लिए आवंटित खाद्यान्न के तहत लगभग 69,000 करोड़ रुपए मूल्य के करीब 200 टन चावल एवं गेहूं का वार्षिक लीकेज या डायवर्जन हो रहा है लेकिन केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय ने इस आंकड़े को गलत बताया है।

उसका कहना है कि मूल रूप से यह मनगढ़ंत एवं भ्रामक आंकड़ा है और इसमें गणना या आंकलन के लिए जो विधि अपने गई है वह भी सही नहीं है।

उल्लेखनीय है कि संस्था ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (मुफ्त राशन स्कीम) के तहत राज्यों द्वारा खाद्यान्न के किए जाने वाले मासिक उठाव को ध्यान में रखते हुए लीकेज की मात्रा का आंकलन लिया था।

यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान किए गए घरेलू व्यय सर्वेक्षण की संदर्भ अवधि के साथ जोड़कर तैयार किया गया था।

इस सर्वेक्षण के आंकड़ों में विभिन्न स्रोतों से अनाज की खपत को शामिल किया गया था। इसके तहत विभिन्न राज्यों द्वारा चलाई जा रही खास योजनाओं और प्राइवेट खरीद को ध्यान में रखा गया था जबकि पीडीएस उठाव के साथ इसका कोई सीधा सम्पर्क नहीं है।

खाद्य मंत्रालय ने कहा है कि जो राज्य अपने स्तर से विशिष्ट योजना जारी रखे हुए है उसे केन्द्र से खाद्यान्न मिलना जरुरी नहीं है और इसलिए अगर उसका लीकेज होता है तो उसे पीडीएस वाले अनाज का डायवर्जन नहीं माना जा सकता है।

सरकारी उठाव के आंकड़े केवल ट्रांजिट में मौजूद स्टॉक, बफर आवंटन, संचलनीय या क्रियाशील आरक्षित (रिजर्व) स्टॉक तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए आवंटन तथा खुले बाजार बिक्री से ताल्लुक रखते हैं और इसलिए घरेलू उपभोक्ताओं में वितरण के लिए इस्तेमाल होने वाले पीडीएस स्टॉक के साथ इसको जोड़ना सही नहीं है

क्योंकि इससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। राज्य सरकारें अपनी स्कीम के लिए अनाज की खरीद कैसे और कहां से करती है इससे खाद्य मंत्रालय को कुछ लेना देना नहीं है। मंत्रालय केवल अपनी योजनाओं के प्रति जिम्मेदार है।