पंजाब में मिलेट्स का क्षेत्रफल बढ़ाना एक गंभीर चुनौती
13-Aug-2024 03:24 PM
चंडीगढ़ । हालांकि पंजाब में पिछले तीन साल के दौरान खाद्यान्न फसलों के उत्पादन क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन राज्य के किसान मिलेट्स की खेती से दूर भाग रहे हैं।
इसके फलस्वरूप राज्य में मिलेट्स का रकबा खाद्यान्न फसलों के सकल क्षेत्रफल के महज 0.01 प्रतिशत पर अटका हुआ है।
2021-22 सीजन के दौरान पंजाब में खाद्यान्न फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 66.68 लाख हेक्टेयर रहा था जो 2023-24 में बढ़कर 68.19 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।
लेकिन इसी अवधि में मिलेट्स का बिजाई क्षेत्र 12 हजार हेक्टेयर से घटकर 7 हजार हेक्टेयर पर अटक गया। ध्यान देने की बात है कि केन्द्र और राज्य सरकार किसानों को मिलेट्स का क्षेत्रफल तथा उत्पादन बढ़ाने के लिए काफी प्रोत्साहन दे रही है।
वर्ष 2023 को 'अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष' के रूप में विश्व स्तर पर मनाया गया जिसकी पहल भारत ने ही की थी।
उल्लेखनीय है कि पंजाब के किसानों का ध्यान, मुख्यत: धान और गेहूं की खेती पर केन्द्रित रहता है क्योंकि केन्द्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से इसकी सम्पूर्ण अधिशेष मात्रा की खरीद निश्चित रूप से करती है लेकिन अन्य फसलों की खरीद पर ज्यादा ध्यान नहीं देती है।
दलहन, तिलहन एवं मिलेट्स सहित मोटे अनाजों का खुला बाजार भाव घटता बढ़ता रहता है इसलिए किसानों को कई बार आर्थिक नुकसान हो जाता है जिससे इसकी खेती के प्रति उसका उत्साह एवं आकर्षण बहुत कम रहता है।
पंजाब गंभीर जल संकट की ओर बढ़ रहा है लेकिन फिर भी वहां किसान धान की खेती नहीं छोड़ना चाहते हैं क्योंकि इस पर निश्चित मूल्य की गारंटी रहती है।
यदि मिलेट्स का उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को प्रेरित-प्रोत्साहित और राजी करना है तो उसे विश्वास दिलाना पड़ेगा कि इसका उत्पादन उसके लिए धान से ज्यादा लाभदायक साबित होगा।
पंजाब के पड़ोसी राज्य हरियाणा में पिछले तीन साल में मिलेट्स का रकबा बढ़ा है मगर यह वृद्धि सीमित रही। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार हरियाणा में मिलेट्स का उत्पादन क्षेत्र 2021-22 सीजन के 5.06 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 2023-24 के सीजन में 5.46 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जबकि हिमाचल प्रदेश में यह 3380 हेक्टेयर गिरकर 3000 हेक्टेयर रह गया।
पंजाब में मिलेट्स का क्षेत्रफल बढ़ाना सरकार के लिए के गंभीर चुनौती है और इसका सामना करने के लिए, ठोस सटीक, सामयिक तथा व्यावहारिक नीति लागू करने की आवश्यकता है जो किसानों को आकर्षित करने में सक्षम हो सके।
