पंजाब में शिकायत निपटान पोर्टल के जरिए राइस मिलर्स का मामला सुलझाने का प्रयास
29-Oct-2024 12:07 PM
चंडीगढ़ । पंजाब में धान-चावल की सरकारी खरीद की धीमी गति से किसानों में भारी आक्रोश है जबकि राइस मिलर्स एवं शैलर्स भी कुछ खास कारण से परेशान हैं। दरअसल केन्द्रीय पूल में खाद्यान्न का सर्वाधिक योगदान देने वाले इस राज्य में अनाज के सुरक्षित के लिए गोदामों में पर्याप्त जगह नहीं है और राइस मिलर्स सरकारी धान का स्टॉक करने के लिए तैयार नहीं है।
मामला पी आर 126 किस्म के धान से चावल की औसत रिकवरी दर पर भी अटका हुआ है। केन्द्र सरकार ने धान से चावल की रिकवरी दर 67 प्रतिशत निर्धारित कर रखी है जबकि मिलर्स का कहना है कि पी आर 126 किस्म के धान से चावल की रिकवरी दर 62-63 प्रतिशत ही बैठती है। इसकी सच्चाई का पता लगाने के लिए विशेष उपाय किए जा रहे हैं।
केन्द्रीय खाद्य, उपभोक्ता मामले एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री द्वारा पिछले दिन राइस मिलर्स की समस्याओं एवं शिकायतों को दूर करने के लिए एक ऑन लाइन पोर्टल लांच की गई।
अधिकारियों का दावा है कि शिकायत मिलने के बाद तीन दिन के अनेर उसका निपटारा कर दिया जाएगा। गोदाम में जगह बनाने के लिए पंजाब से प्रतिमाह 13-14 लाख टन खाद्यान्न को अन्य राज्यों में भेजने का प्रबंध किया जा रहा है। इसकी प्रक्रिया मार्च 2025 तक जारी रहेगी।
दिसम्बर 2024 से राइस मिलर्स भारतीय खाद्य निगम के गोदामों पर कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) की आपूर्ति शुरू करेंगे और सरकार को उम्मीद है कि तब तक चावल के भंडारण के लिए गोदामों में काफी स्थान खाली हो जाएगा।
चावल की खरीद की गति अब तक इसलिए धीमी चल रही थी क्योंकि भंडारण का संकट बना हुआ था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष 23 अक्टूबर तक पंजाब में केवल 20.60 लाख टन चावल (इसके समतुल्य धान) की खरीद हो सकी जो पिछले साल की समान अवधि की खरीद लगभग 32 लाख टन से 36 प्रतिशत कम रही।
