पीली मटर पर आयात शुल्क लगने से दलहन बाजार पर सीमित असर
03-Nov-2025 04:16 PM
मुंबई। हालांकि भारी दबाव के कारण केंद्र सरकार ने पीली मटर के आयात पर 30 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगा दिया है जो 1 नवम्बर 2025 से प्रभावी भी हो चुका है लेकिन व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि सरकार के इस निर्णय का घरेलू दलहन बाजार पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि पीली मटर का वैश्विक बाजार मूल्य पहले ही घटकर काफी नीचे आ चुका है। हालांकि घरेलू दलहन बाजार पर थोडा-बहुत मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ सकता है लेकिन इसमें बहुत बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं के जानी चाहिए। समीक्षकों के अनुसार यह ध्यान रखना आवश्यक है कि पीली मटर के आयात पर प्रतिबन्ध नहीं लगाया गया है बल्कि सिर्फ समा शुल्क लगाया गया है इसलिए देश में कनाडा एवं रूस जैसे देशों से इसका आयात जारी रहेगा।
भारत में पीली मटर के साथ-साथ तुवर, उड़द, देसी चना एवं मसूर का आयात भी जारी है। देशी चना एवं मसूर पर 10-10 प्रतिशत का आयात शुल्क लागू है जबकि तुवर एवं उड़द का आयात 31 मार्च 2026तक शुल्क मुखत रखने की घोषणा की गयी है। वैसे भी 31 अक्टूबर 2025 तक के बिल ऑफ़ लेडिंग के आधार पर पीली मटर के होने वाले आयात पर कोई शुल्क नहीं लगेगा और ऐसे माल के खेप भारतीय बंदरगाहों पर 30-40 दिनों तक पहुंच सकती है। इसके फलस्वरूप घरेलू बाजार में दलहनों की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम बनी रहेगी और कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं आ पाएगा। खरीफ कालीन दलहन फसलों और खासकर उड़द एवं मूंग के नए माल की आवक पहले ही शुरू हो चुकी है जबकि अगले कुछ ही सप्ताहों में तुवर की नई फसल की कटाई-तैयारी भी आरम्भ हो जाएगी।
इस बीच रबी सीजन के सबसे प्रमुख दलहन-चना एवं मसूर-मटर की बिजाई भी शुरू हो चुकी है। चना का बिजाई क्षेत्र 2023-24 की 105 लाख हेक्टेयर से घटाकर 2024-25 के सीजन में 98 लाख हेक्टेयर रह गया। कृषि मंत्रालय के मुताबिक लेकिन मौसम की हालत अनुकूल रहने से इक उत्पादन सुधरकर 113 लाख टन पर पहुंच गया। 2025-26 के मौजूदा रबी सीजन में चना का बिजाई क्षेत्र कुछ सुधर सकता है क्योंकि इसके लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। दलहन बाजार में सामान्य कारोबार के बीच कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
