पॉल्ट्री उद्योग में बढ़ती मांग से अमरीकी सोयामील के आयात पर हो सकता है विचार
07-Oct-2025 12:29 PM
नई दिल्ली। हालांकि अमरीका अपने सोयामील एवं मक्का के लिए भारतीय बाजार पर नजर गड़ाए हुए है जबकि भारत इन दोनों उत्पादों के मामले में लगभग आत्मनिर्भर है।
इसके बावजूद आगामी समय में पॉल्ट्री उद्योग में बढ़ने वाली मांग को पूरा करने के लिए अमरीकी सोयामील के आयात की अनुमति देने पर विचार किया जा सकता है।
वैसे सरकार की ओर से अभी तक इस आशय का कोई संकेत नहीं दिया गया है और अमरीका के साथ व्यापार वार्ता में गतिरोध बरकरार है।
कम्पाऊण्ड लिव स्टॉक फीड मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के चेयरमैन का कहना है कि यदि प्रोटीन से समृद्ध पशु आहार अवयव (सोयामील) के आयात की अनुमति दी जाएगी भारत और अमरीका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता (बीटीए) का रास्ता साफ हो सकता है।
भारत को भविष्य में अमरीका से सोया डीओसी के आयात की आवश्यकता पड़ सकती है क्योंकि देश में पॉल्ट्री उद्योग का तेजी से विकास-विस्तार हो रहा है। वैसे फिलहाल भारत सोयामील में आत्मनिर्भर है।
दरअसल चीन ने अमरीका से सोयाबीन एवं इसके उत्पादों का आयात बंद कर दिया है जिससे अमरीका के किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। चीन अमरीकी सोयाबीन का सबसे बड़ा खरीदार रहा है और इस विशाल बाजार के बंद होने से अमरीका को अपने उत्पादों के निर्यात के लिए वैकल्पिक बाजार की तलाश है।
भारत में यह तलाश पूरी हो सकती है लेकिन सरकार इसके आयात की अनुमति देने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि अमरीका में उत्पादित सोयाबीन का 96 प्रतिशत भाग जीएम श्रेणी का होता है जबकि भारत में जीएम खाद्य फसलों के उत्पादन, आयात, कारोबार तथा इस्तेमाल पर सख्ती से प्रतिबंध लगा हुआ है।
एसोसिएशन के चेयरमैन का कहना है कि निस्संदेह व्यापार वार्ता में भारत सरकार को अपने विभागों के हितों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखना है और इसलिए कोई भी निर्णय जल्दबाजी में नहीं लिया जा सकता है।
अमरीकी सोयाबीन उत्पादकों की चिंता एवं कठिनाई अपनी जगह सही है लेकिन इसके लिए भारतीय किसानों के हितों की बलि नहीं दी जा सकती है।
लेकिन भारत में इससे पूर्व अर्जेन्टीना से थोड़ी-बहुत मात्रा में सोयामील का आयात हो चुका है। वैसे अमरीका भारत में अपने सोयाबीन के बजाए सोयामील का निर्यात बढ़ाने का ज्यादा इच्छुक है।
सोयामील का आयात होने से भारत में जीएम सोयाबीन के उत्पादन का खतरा नहीं रहेगा। पॉल्ट्री उद्योग में इसका इस्तेमाल हो सकता है।
