पाम तेल का आयात घटने से खाद्य तेलों के स्टॉक में जोरदार गिरावट

15-May-2025 05:14 PM

नई दिल्ली। भारत में पिछले कई महीनों से पाम तेल का आयात बहुत कम हो रहा है जिससे इसके स्टॉक में भारी गिरावट आ गई है और खाद्य तेलों का कुल स्टॉक भी काफी घट गया है।

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) के आंकड़ों से पता चलता है कि 1 मई 2025 को भारतीय बंदरगाहों पर पाइप लाइन में संयुक्त रूप से केवल 13.51 लाख टन खाद्य तेलों का स्टॉक बचा हुआ था जो पिछले चार वर्षों का न्यूनतम स्तर था। जनवरी से अप्रैल 2025 तक किसी भी माह में पाम तेल का आयात 5 लाख टन तक नहीं पहुंच सका। 

इससे पूर्व भारत में 1 मई 2020 को 9.10 लाख टन खाद्य तेलों का स्टॉक दर्ज किया गया था और 1 मई  2025 का स्टॉक उसके बाद का सबसे निचला स्तर रहा।

आमतौर पर देश में करीब 31-32 दिनों की घरेलू मांग एवं जरूरत को पूरा करने लायक खाद्य तेलों के आयात को बरकरार रखा जाता है मगर वर्तमान स्टॉक 20 दिनों की खपत को भी पूरा करने में सक्षम नहीं है।

यदि मई में पाम तेल का आयात नहीं बढ़ा तो खाद्य तेलों के दाम में बढ़ोत्तरी हो सकती है। भारत को आगामी महीनों में पाम तेल एवं सोयाबीन तेल का आयात बढ़ाना पड़ सकता है जिससे आपूर्तिकर्ता देशों में इसका भाव तेज होने की आशंका रहेगी।

इसके तहत मलेशिया में क्रूड पाम तेल एवं अमरीका में क्रूड डिगम्ड सोयाबीन तेल के बेंचमार्क वायदा मूल्य में तेजी मजबूती का माहौल बन सकता है। 

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मार्च के मुकाबले अप्रैल में पाम तेल का आयात 24.29 प्रतिशत घटकर 3,21,446 टन पर अटक गया। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक के अनुसार कमजोर स्टॉक का मतलब यह नहीं है कि देश के अंदर खाद्य तेलों की अपर्याप्त आपूर्ति हो रही है।

यह आयात और स्टॉक इसलिए भी घट गया है क्योंकि देश में सरसों की जोरदार क्रशिंग हो रही है और इसके तेल का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। घरेलू प्रभाग में कुल मिलाकर खाद्य तेलों की आपूर्ति अच्छी बनी हुई है।

कार्यकारी निदेशक के मुताबिक प्रति माह नेपाल से सड़क मार्ग के लिए भारत में करीब 60-70 हजार टन रिफाइंड खाद्य तेल मंगाया जा रहा है जो घरेलू बाजार में तो पहुंचता है मगर बंदरगाहों तक नहीं तक नहीं आता है।

लेकिन इस वास्तविकता से इंकार नहीं किया जा सकता है कि अप्रैल 2024 की तुलना में अप्रैल 2025 के दौरान खाद्य तेलों के आयात में 32 प्रतिशत की जोरदार गिरावट आ गई।