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30-Sep-2026 03:38 PM
मेलबोर्न। विषुवतीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान जिस तेजी से बढ़ रहा है उसी तेज गति से अल नीनो मौसम चक्र की तीव्रता एवं ताकत भी बढ़ती जा रही है। इसकी शक्ति बढ़कर लगभग रिकॉर्ड स्तर के आसपास पहुंच गई है।
नीनो 3.4 इंडेक्स पर तापमान 27 सितम्बर से बढ़कर 2.7 डिग्री सेल्सियस हो गया जो अब तक का दूसरा सबसे ऊंचा स्तर है। विभिन्न मौसम मॉडल्स से संकेत मिलता है कि आगामी समय में यह तापमान और भी बढ़ सकता है जिससे अल नीनो का प्रकोप अपने चरण पर पहुंच सकता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अक्टूबर-नवम्बर में यह तापमान 3 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर निकल जाएगा और तब सुपर अल नीनो की आशंका उत्पन्न हो सकती है।
दिलचस्प तथ्य यह है कि हिन्द महासागर में एक घनात्मक डायपोल (आईओडी) का निर्माण इसी अवधि के दौरान होने की संभावना है जिससे अल नीनो की तीव्रता का असर कुछ क्षेत्रों में घट सकता है। अल नीनो अभी कुछ महीनों तक अनेक क्षेत्रों के लिए प्रभावशाली रह सकता है जिससे मौसम एवं वर्षा के पैटर्न में बदलाव आने की आशंका है। इसके फलस्वरूप कृषि, बागवानी तथा बागानी फसलों के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। इसमें दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के देश भी शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि विषुवतीय प्रशांत महासगार में जब समुद्री सतह का तापमान 0.80 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचता तब अल नीनो का निर्माण शुरू हो जाता है और इस तापमान के बढ़ने के क्रम में अल नीनो की ताकत एवं तीव्रता भी बढ़ती जाती है। इससे पूर्व 22 नवम्बर 2015 को यह तापमान 2.76 डिग्री सेल्सियस के शिखर पर पहुंचा था जबकि 27 सितम्बर 2026-27 तापमान (2.70 डिग्री सेल्सियस) उससे कुछ ही नीचे था।