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30-Sep-2026 02:51 PM
मुम्बई। रूस तथा यूक्रेन जैसे देशों से अपेक्षाकृत सस्ते सूरजमुखी तेल का आयात प्रभावित होने के कारण भारत सरकार को इस पर सीमा शुल्क की दर में पाम तेल एवं सोयाबीन तेल से ज्यादा कटौती करनी पड़ी। क्रूड पाम तेल एवं क्रूड सोयाबीन तेल पर 10-10 प्रतिशत का मूल आयात हुआ था जिसे घटाकर 5 प्रतिशत नियत किया गया। सूरजमुखी तेल के क्रूड स्वरूप पर भी 10 प्रतिशत का ही आयात शुल्क लगा हुआ था लेकिन इसे पूरी तरह घटाकर शून्य प्रतिशत निर्धारित किया गया।
यही स्थिति रिफाइंड खाद्य तेलों पर भी लागू हुई। रिफाइंड सोयाबीन तेल एवं आरबीडी पाम तेल / पामोलीन पर 32.5 प्रतिशत का मूल आयात शुल्क लागू था जिसे 5 प्रतिशत बिंदु घटाकर 27.5 प्रतिशत नियत किया गया। रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर भी 32.5 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगा हुआ था मगर उसे 10 प्रतिशत बिंदु घटाकर 22.5 प्रतिशत निर्धारित किया गया है।
हाल के वर्षों में रूस भारत को सूरजमुखी के सबसे प्रमुख आपूर्तिकर्ता देश के रूप में उभरकर सामने आया है जो अब यूक्रेन, अर्जेन्टीना एवं रोमानिया सहित अन्य निर्यातक देशों द्वारा की जाने वाली संयुक्त आपूर्ति से भी ज्यादा सूरजमुखी तेल भारत भेज रहा था। वस्तुतः भारत में 50 प्रतिशत से ज्यादा सूरजमुखी तेल अकेले रूस से मंगाया जा रहा है।
लेकिन चालू मार्केटिंग सीजन के शुरूआती 10 महीनों में यानी नवम्बर 2025 से अगस्त 2026 के दौरान भारत में रूस से करीब 12.20 लाख टन सूरजमुखी तेल का आयात हो सका जो 2024-25 सीजन की समान अवधि के आयात से लगभग 14 प्रतिशत कम रहा। रूस-यूक्रेन के बीच जारी भयंकर युद्ध के कारण काला सागर के जल मार्ग से सृजमुखी तेल का शिपमेंट ठप्प पड़ गया है।