26 सितम्बर को U.P. रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन की वार्षिक आम बैठक (AGM), लखनऊ के मुख्य अंश
मीटिंग में विशेषज्ञ की राय
★ एफसीआई को OMSS बिक्री में किराये भाड़े के साथ अब केयरिंग कास्ट भी जोड़नी चाहिए। OMSS के तहत उत्तर प्रदेश को कम से कम 20% कोटा दिया जाना चाहिए। गत वर्ष 100 सदस्य एसोसिएशन में शामिल हुए।
★ मीटिंग में कहा गया कि उत्तर व दक्षिण भारत में गेहूं की कीमतें हमेशा अलग रहती हैं। कुछ उत्पादक राज्य हैं तो कुछ खपतकर्ता।
★ एक देश एक रेट गेहूं मामले में सही नहीं। OMSS स्कीम पर कोई सब्सिडी नहीं देनी चाहिए।
★ उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक राज्य।
★ सरकार को उत्तर प्रदेश राज्य में उत्पादन बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
★ एक पैनल में कहा गया कि बीते सीजन में उत्पादन अनुमान 1100 लाख टन था जिसे बाद में घटाकर 1050 लाख टन किया गया।
★ बारिश के कारण उत्पादकता पर पड़ा असर और गत वर्ष भी उत्पादन 1050 लाख टन था।
★ प्राइवेट में स्टॉक कमजोर व सरकार के पास अधिक।
★ बांग्लादेश ऊंचे भावों पर गेहूं खरीदने को इच्छुक नहीं।
★ भारत से बांग्लादेश को रैक मूवमेंट में भाव 300-305$ के आसपस।
★ विश्व में गेहूं की उपलब्धता अच्छी परन्तु गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहा माल।
★ अगर ब्लैक सी विवाद ख़त्म हुआ तो अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गेहूं की कीमतें 60-65$ घट सकती हैं।
★ युद्द के कारण किसान निचले भावों पर गेहूं बेचने को तैयार व सरकार से भी नाराज।
★ भारत से अभी तक करीब 2.5 लाख टन गेहूं का हुआ निर्यात। सीजन भर में निर्यात 6-7 लाख टन रहने की उम्मीद।
★ स्टॉक मामले में सरकार संतोषजनक स्थिति में।
★ OMSS के तहत गेहूं बेचने की जल्दबाजी सरकार शायद ही करे। गेहूं की कीमतों में विशेष तेजी-मंदी कम।
★ कीमतें रिजर्व भाव के आसपास रहने की उम्मीद, सरकार PDS के तहत अब 3 महीने का इकठ्ठा राशन भी दे रही है।
★ निर्यात से बाजारों का मनोबल ऊंचा रह सकता है।
★ नियमों में बदलाव किये जाने से पहले सरकार को मिलर्स को एडवांस में सूचना देनी चाहिए ताकि वह नियमों के अनुसार अपने कार्य में बदलाव कर सकें।
★ पिछली सरकारी खरीद में 70% यूआरएस गेहूं मध्य प्रदेश व 20-30% पंजाब में ख़रीदा गया जबकि स्थिति इससे कुछ अलग दिख रही हैं। गेहूं कक्क क्वालिटी गत वर्ष से खराब परन्तु इतनी भी नहीं जैसी घोषणा की गयी।
★ पैनालिस्ट का मानना है कि बारिश के कारण उत्पादन 30 लाख टन घटा।
★ अगर OMSS स्कीम नहीं आती तो दिसंबर-जनवरी तक कीमतें 100-150 रुपए बढ़ सकती हैं। लम्बी तेजी की उम्मीद कम।