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नए माल की आवक से रूई की कीमतों पर दबाव पड़ने की संभावना

30-Sep-2026 04:14 PM

नए माल की आवक से रूई की कीमतों पर दबाव पड़ने की संभावना

मुम्बई। अन्तर्रष्ट्रीय बाजार में भाव नरम पड़ने, घरेलू प्रभाग में नए माल की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ने तथा मांग कमजोर रहने से रूई की कीमतों पर आगे दबाव पड़ने की संभावना है।

हालांकि पिछले साल की तुलना में इस वर्ष कपास के बिजाई क्षेत्र में करीब एक लाख हेक्टेयर की कमी आई है और कुछ क्षेत्रों में फसल को प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान होने की सूचना भी मिल रही है लेकिन जब तक तुड़ाई-तैयारी का जोरदार सीजन जारी रहेगा तब तक कीमतों में भारी तेजी आने की संभावना कम रहेगी। 31 अक्टूबर 2026 तक विदेशों से रूई का शुल्क मुक्त आयात जारी रखने की अनुमति पहले ही दी जा चुकी है। 

न्यूयार्क स्थित इंटरकांटीनेंटल एक्सचेंज (आईसीई) में दिसम्बर डिलीवरी के लिए रूई के वायदा मूल्य में पिछले कुछ सप्ताहों से नरमी का माहौल बना हुआ है। अगस्त के अंत में वायदा मूल्य बढ़कर 93 सेंट प्रति पौंड के शीर्ष स्तर पर पहुंचा था जो अब घटकर 80 सेंट प्रति पौंड के आसपास आ गया है। इसके फलस्वरूप घरेलू प्रभाग में भी रूई का दाम करीब 70,000 रुपए प्रति कैंडी (356 किलो) से घटकर 64,500-65,000 रुपए प्रति कैंडी रह गया है।

सरकारी एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) के पुराने स्टॉक की रूई का नीलामी मूल्य भी पिछले दो दिनों में 1200 रुपए प्रति कैंडी नरम पड़ा है। यह रूई 2025-26 के सीजन में खरीदी गई थी। बिनौला के दाम में आ रही गिरावट के असर से भी रूई की कीमत घट रही है। बिनौला का भाव 300-400 रुपए की गिरावट के साथ अब 4600-4700 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया है। प्रमुख उत्पादक राज्यों में कपास की नई फसल की तुड़ाई-तैयारी एवं मंडियों में आवक धीरे-धीरे जोर पकड़ने लगी है।