प्रतिकूल मौसम के कारण गेहूं का उत्पादन नियत लक्ष्य से कम होने की संभावना
04-May-2026 08:45 PM
मुम्बई। एक अग्रणी व्यापारिक कम्पनी के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इस वर्ष गेहूं के घरेलू उत्पादन के परिदृश्य में अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। पहले बिजाई क्षेत्र में 6 लाख हेक्टेयर की बढ़ोत्तरी होने तथा मौसम की हालत अनुकूल रहने से गेहूं का उत्पादन तेजी से उछलकर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान लगाया जा रहा था लेकिन मार्च-अप्रैल की आंधी-वर्षा एवं ओलावृष्टि से उत्पादन का समीकरण बदल गया है। इसे देखते हुए अब गेहूं का घरेलू उत्पादन या तो पिछले सीजन के लगभग बराबर या उससे कुछ कम होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। कई क्षेत्रों में गेहूं की क्वालिटी भी प्रभावित हुई है और इसका दाना बदरंग तथा चमकहीन हो गया है।
कम्पनी के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार प्राकृतिक आपदाओं का प्रकोप अभी समाप्त नहीं हुआ है और खतरा बरकरार है। बेमौसमी वर्षा तथा आंधी-तूफान से फसल क्षतिग्रस्त हो रही है। मंडियों (क्रय केन्द्रों) में रखा गेहूं भी बर्बाद हो सकता है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान में फसल के लिए जोखिम बरकरार है।
आगामी महीनों में अल नीनो मौसम चक्र के प्रभाव से दक्षिण-पश्चिम मानसून के सीजन में वर्षा की कमी महसूस हो सकती है और किसानों को उर्वरकों के अभाव का सामना करना पड़ सकता है। खरीफ उत्पादन पर इसका प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। यदि अल नीनो का प्रभाव सितम्बर के बाद भी जारी रहा तो अगले रबी सीजन में गेहूं की बिजाई प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल सरकार के पास चावल और गेहूं का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है इसलिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए कोई खतरा नहीं है। सरकार ने 50 लाख टन गेहूं एवं 10 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी है।
मंडियों में गेहूं की अच्छी आवक हो रही है और कीमतों में भी सीमित उतार-चढ़ाव के साथ लगभग स्थिरता बनी हुई है। कमजोर क्वालिटी के गेहूं की आपूर्ति सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से की जानी है जबकि सामान्य औसत क्वालिटी वाले अनाज का भंडारण अधिक समय तक हो सकेगा। निर्यातक भी इसी क्वालिटी के गेहूं का निर्यात कर सकेंगे।
