रबी फसलों की बिजाई की गति में आ रही तेजी लेकिन दक्षिण भारत में स्थिति कमजोर
12-Nov-2024 01:49 PM
नई दिल्ली । त्यौहारी सीजन की समाप्ति के बाद अब किसानों ने देश के अधिकांश राज्यों में रबी फसलों की बिजाई की गति तेज कर दी है और इसके फलस्वरूप चना, गेहूं तथा सरसों सहित अन्य फसलों का रकबा बढ़ने लगा है। लेकिन दक्षिण भारत में बारिश होने से रफ्तार कुछ धीमी है।
केरल, आंध्र प्रदेश एवं तमिलनाडु जैसे राज्यों में वर्षा का दौर अभी जारी है। एक विश्लेषक के अनुसार खेतों में पानी भरने या नमी का अंश ऊंचा रहने से इन दक्षिणी राज्यों में खासकर चना की बिजाई में बाधा पड़ने की आशंका है जिससे किसान उड़द जैसी अन्य फसलों की खेती पर ध्यान दे सकते हैं क्योंकि इसका दाम भी आकर्षक बना हुआ है।
उड़द भी बिजाई का समय लम्बा होता है और तब तक खेत इसकी बिजाई के लिए तैयार हो सकते हैं। वैसे भी रबी सीजन के दौरान आंध्र प्रदेश एवं तमिलनाडु में उड़द की खेती बड़े पैमाने पर होती है और ये दोनों इसके महत्वपूर्ण उत्पादक राज्य माने जाते हैं।
पिछले सीजन में तुवर, उड़द एवं चना का उत्पादन कम होने से इसका घरेलू बाजार भाव काफी ऊंचा और तेज हो गया तथा विदेशों से इसका भारी आयात करना पड़ा।
इस बार खरीफ सीजन में उड़द का उत्पादन घटने की आशंका है जबकि तुवर एवं मूंग के उत्पादन में अच्छी वृद्धि होने की उम्मीद है। मूंग के आयात पर लम्बे समय से प्रतिबंध लगा हुआ है। रबी सीजन में किसान उड़द का क्षेत्रफल तथा उत्पादन बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे सकते हैं।
जहां तक रबी सीजन के सबसे प्रमुख खाद्यान्न- गेहूं का सवाल है तो देश के पश्चिमी राज्यों में इसकी बिजाई जोर शोर से हो रही है। गेहूं का भाव सरकारी समर्थन मूल्य से काफी ऊंचा चल रहा है जिससे किसानों को इसका क्षेत्रफल बढ़ाने का प्रोत्साहन मिल सकता है।
राजस्थान में गेहूं का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष के 6 हजार हेक्टेयर की तुलना में करीब 8 गुणा उछलकर इस बार 46 हजार हेक्टेयर पर पहुंच गया है। राजस्थान में इस बार 32 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बोआई का लक्ष्य नियत किया गया है।
गुजरात तथा मध्य प्रदेश के बाद अब पंजाब तथा हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी गेहूं की बिजाई शुरू हो गई है। इसके अलावा सरसों, जौ, मसूर तथा मटर की बिजाई भी आरंभ हो चुकी है।
