रबी फसलों का रकबा बढ़कर 652 लाख हेक्टेयर से पहुंचा
20-Jan-2026 01:42 PM
नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम साप्ताहिक आंकड़ों से पता चलता है कि इस बार 16 जनवरी 2026 तक रबी फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 652.33 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 631.45 लाख हेक्टेयर से 2.8 प्रतिशत अधिक है।
9 से 16 जनवरी वाले सप्ताह के दौरान देश में करीब 8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की खेती हुई जिसमें मुख्य भागीदारी धान की रही। दूसरी ओर गेहूं, चना, मसूर, मटर, जौ तथा सरसों जैसी प्रमुख रबी फसलों की बिजाई पूरी हो चुकी है और फरवरी मार्च से इसकी कटाई-तैयारी आरंभ हो जाएगी।
उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार ने 2025-26 के मौजूदा रबी सीजन के दौरान 1711.40 लाख टन खाद्यान्न के उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है जिसमें 1190 लाख टन गेहूं, 158.60 लाख टन चावल, 165.70 लाख टन दलहन, 31.70 लाख पोषक अनाज, 145 लाख टन मक्का तथा 20.50 लाख टन जौ का उत्पादन लक्ष्य शामिल है।
इसके अलावा 139 लाख टन सरसों के साथ कुल 150.70 लाख टन तिलहनों के उत्पादन का लक्ष्य भी नियत किया गया है।
समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान गेहूं की बोआई में कोई बदलाव नहीं हुआ और इसका रकबा 334.17 लाख हेक्टेयर पर ही बरकरार रहा जो गत वर्ष के क्षेत्रफल 328.04 लाख हेक्टेयर से 6.13 लाख हेक्टेयर ज्यादा है।
2024-25 के रबी सीजन में गेहूं का घरेलू उत्पादन तेजी से बढ़कर 1179.40 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया था।
रबी कालीन दलहनों का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 133.18 लाख हेक्टेयर से 2.8 प्रतिशत बढ़कर इस बार 137 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा। इसके तहत चना का बिजाई क्षेत्र 91.22 लाख हेक्टेयर से 5.1 प्रतिशत उछलकर 95.88 लाख हेक्टेयर तथा मसूर का क्षेत्रफल 17.66 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 18.12 लाख हेक्टेयर हो गया।
इसी तरह तिलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र 93.33 लाख हेक्टेयर से 3.8 प्रतिशत बढ़कर 96.86 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। इसके तहत सरसों का बिजाई क्षेत्र 89.36 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जो गत वर्ष के क्षेत्रफल 86.57 लाख हेक्टेयर से 3.2 प्रतिशत अधिक रहा।
इसके अलावा रबी कालीन धान का उत्पादन क्षेत्र 20.98 लाख हेक्टेयर से 11.4 प्रतिशत उछलकर 25.58 लाख हेक्टेयर, मक्का का बिजाई क्षेत्र 25.05 लाख हेक्टेयर से 7.4 प्रतिशत बढ़कर 27.55 लाख हेक्टेयर तथा जौ का क्षेत्रफल 6.08 लाख हेक्टेयर से 21 प्रतिशत उछलकर 7.37 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो सामान्य औसत क्षेत्रफल 5.63 लाख हेक्टेयर से भी काफी अधिक रहा।
