राज्य सरकारों से खाद्यान्न भंडारण सुविधा के विकास-विस्तार का आग्रह

17-Dec-2025 04:14 PM

नई दिल्ली। केन्द्रीय खाद्य उपभोक्ता मामले एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री ने धान और गेहूं की बढ़ती खरीद को देखते हुए देश के सभी राज्यों को खाद्यान्न की भंडारण क्षमता एवं सुविधा का तेजी से विकास-विस्तार करने के लिए कहा है।

खाद्य मंत्री के अनुसार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में बुनियादी ढांचे में सुधार आने से ट्रांजिट और भंडारण के क्रम में खाद्यान्न के नुकसान में भारी कमी आ गई है। सम्पूर्ण सिस्टम में नई एवं उन्नत टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाने तथा गतिविधियों का संचालन बेहतर ढंग से होने के कारण खाद्यान्न की क्षति बहुत कम हो रही है।

खाद्य मंत्री के अनुसार पिछले 11 वर्षों के दौरान धान और गेहूं की सरकारी खरीद में कई गुणा की बढ़ोत्तरी हो गई लेकिन भंडारण क्षमता एवं सुविधा में इसके अनुरूप विकास-विस्तार नहीं हो सका। 2014-15 के सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन में 478 लाख टन धान की सरकारी खरीद हुई थी

और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के तौर पर किसानों को 66,949 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया था। इसके मुकाबले 2024-25 के मार्केटिंग सीजन में धान की सरकारी  खरीद उछलकर 813 लाख टन पर पहुंची और किसानों को होने वाले भुगतान की राशि भी बढ़कर 1,88,821 करोड़ रुपए पर पहुंच गई।

सरकार की अनुकूल नीति के कारण धान की पैदावार एवं खरीद में जबरदस्त बढ़ोत्तरी हुई। धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भारी इजाफा हो गया। 

खाद्य मंत्री का कहना था कि देश में फिलहाल धान और गेहूं का अधिशेष स्टॉक मौजूद है और खरीद कालीन धान की जोरदार खरीद भी जारी है। राज्यों द्वारा लगातार खाद्यान्न की खरीद का स्तर बढ़ाए जाने की मांग हो रही है। केंद्र तो इसकी खरीद के लिए तैयार है

लेकिन सभी राज्यों सरकारों से आग्रह किया जा रहा है कि वे नई-नई भंडारण सुविधाओं का निर्माण और विस्तार करे। केन्द्र सरकार इसके लिए आवश्यक फंड (धनराशि) उपलब्ध करवा रही है

और नए-नए गोदामों-वेयर हाउसों के निर्माण की सुविधा भी प्रदान कर रही है। पश्चिम बंगाल सरकार का कोई बकाया लंबित नहीं है लेकिन कुछ राज्य ऐसे हैं जो लाभार्थियों को रिसिप्ट जारी नहीं कर रहे हैं।