साबुत चावल का निर्यात नियंत्रण मुक्त करने का निर्णय स्वागत योग्य- अब ब्रोकन चावल पर निर्णय की बारी

24-Oct-2024 07:30 PM

नई दिल्ली । केन्द्र सरकार ने क्रमिक रूप से बासमती एवं गैर बासमती चावल पर लगाए गए सभी नियंत्रणों, प्रतिबंधों एवं शुल्कों को समाप्त कर दिया है और इस मामले में वही स्थिति बहाल हो गई है जो जुलाई 2023 से पूर्व में प्रचलित थी।

इसके तहत एक खास बात यह है कि गैर-बासमती संवर्ग के तहत सफेद (कच्चे) एवं सेला चावल पर जो निर्यात शुल्क लगा हुआ था उसे भी खत्म कर दिया गया है।

इसी तरह बासमती चावल के लिए 950 डॉलर प्रति टन तथा गैर बासमती सफेद चावल के लिए 490 डॉलर प्रति टन की दर से निर्धारित न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) को भी वापस ले लिया गया है। सेला चावल पर पहले निर्यात शुल्क को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत नियत किया गया और बाद में उसे भी हटा लिया गया। 

थी राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (TREA) के कार्यकारी निदेशक राजीव कुमार ने सरकार के उपरोक्त निर्णयों का स्वागत करते हुए कहा है कि अब केवल 100 प्रति टूटे चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा हुआ है और घरेलू प्रभाग में आपूर्ति एवं उपलब्धता की बेहतर स्थिति तथा कीमतों में स्थिरता को देखते हुए सरकार को इस ब्रोकन चावल का निर्यात भी पूरी तरह खोलने पर विचार करना चाहिए।

मालूम हो कि ब्रोकन चावल के व्यापारिक निर्यात पर सितम्बर 2022 से ही प्रतिबंध लगा हुआ है जबकि उससे पूर्व इसके 30-35 लाख टन का वार्षिक शिपमेंट हो रहा था।  

सेनेगल सहित कई अन्य अफ्रीकी देश टुकड़ी चावल को ज्यादा पसंद करते हैं क्योंकि यह अपेक्षाकृत सस्ता होता है। व्यापारिक प्रतिबंध लागू होने से पूर्व वियतनाम एवं चीन जैसे देश भी ब्रोकन चावल का भारी मात्रा में आयात कर रहे थे।

वर्ष 2021-22 में जब भारत से लगभग 220 लाख टन चावल का रिकॉर्ड निर्यात हुआ था तब उसमें बासमती का योगदान 45 लाख टन एवं गैर बासमती का योगदान 175 लाख टन के करीब रहा था जिसमें 30 लाख टन ब्रोकन राइस का शिपमेंट भी शामिल था। 

भारत से एक बार फिर चावल का शानदार निर्यात होने की आशा व्यक्त करते हुए ऐरिया के कार्यकारी निदेशक राजीव कुमार ने कहा कि निर्यातकों को शिपमेंट बढ़ाने में कोई परेशानी नहीं होगी क्योंकि निर्यात के मोर्चे पर सब कुछ सामान्य हो गया है।