सफेद चावल के निर्यात की अनुमति देने पर संशय बरकरार
08-Aug-2024 08:40 PM
नई दिल्ली । हालांकि घरेलू प्रभाग में चावल की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति को सुगम बनाए रखने तथा कीमतों में तेजी को नियंत्रित करने के लिए सरकार के पास इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और अक्टूबर से इसकी नई सरकारी खरीद भी आरंभ होने वाली है
जिससे स्टॉक में आगे भी नियमित रूप से बढ़ोत्तरी होती रहेगी लेकिन इसके बावजूद सरकार गैर बासमती सफेद चावल के व्यापारिक निर्यात की स्वीकृति देने के लिए तैयार नहीं है जबकि निर्यातक बार-बार इसकी मांग कर रहे हैं।
दरअसल सरकार घरेलू प्रभाग में चावल की उपलब्धता बढ़ाने को प्राथमिकता दे रही है जिससे निर्यात एक गौण विषय हो गया है। वैसे गैर बासमती सेला चावल का निर्यात 20 प्रतिशत के सीमा शुल्क के साथ खुला हुआ है।
खरीफ कालीन धान के उत्पादन क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हो रही है और मानसून की वर्षा की भी समस्या नहीं है। इससे धान-चावल का अगला उत्पादन बेहतर होने के आसार हैं।
केन्द्र सरकार ने राज्यों को भारतीय खाद्य निगम के गोदामों से 2800 रुपए प्रति क्विंटल की दर से चावल खरीदने की खुली छूट दे दी है और खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत भी चावल की बिक्री शुरू करने का फैसला किया है।
इसके साथ-साथ सरकारी एजेंसियों को भारत ब्रांड चावल की खुदरा बिक्री जारी रखने की अनुमति दी गई है। ये सारे उपाय चावल की कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लागू हुए हैं।
1 जुलाई 2024 को गोदामों में 326 लाख टन चावल का विशाल स्टॉक मौजूद था जो पिछले साल की तुलना में 29 प्रतिशत ज्यादा और वर्ष 2005 के बाद सबसे ऊंचा था।
इसके अलावा भारतीय खाद्य निगम के पास धान का भी स्टॉक था जिसकी कस्टम मिलिंग चल रही है।
इससे खाद्य निगम को अतिरिक्त चावल प्राप्त होगा। जुलाई-सितम्बर की तिमाही के दौरान केन्द्रीय पूल में कम से कम 135 लाख टन चावल का स्टॉक मौजूद होना चाहिए
जिसमें 115 लाख टन का क्रियाशील स्टॉक तथा 20 लाख टन का आरक्षित स्टॉक शामिल है। 1 जुलाई 2024 को खाद्य निगम के स्वामित्व में 237 लाख टन धान का स्टॉक भी उपलब्ध था।
