सूखे मेवों की घरेलू मांग में 10-15 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान

16-Dec-2025 11:16 AM

नई दिल्ली। एक अग्रणी संस्था- दि नट्स एंड ड्राई फ्रूट्स कौंसिल (एनडीएफसी) ने आगामी वित्त वर्ष के दौरान सूखे मेवों एवं फलियों की घरेलू मांग एवं खपत में 10-15 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होने का अनुमान लगाया है।

पिछले कुछ वर्षों से मांग इसी रफ्तार से बढ़ रही है। उल्लेखनीय है कि घरेलू उत्पादक सीमित होने से सूखे मेवों के आयात पर निर्भरता बढ़कर 80 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है। 

कौंसिल के अध्यक्ष के अनुसार भारत में छह प्रमुख सूखे मेवों-अखरोट- पिस्ता, काजू, मुनक्का, बादाम और छुहारा की कुल वार्षिक मांग 14.30 लाख टन पर पहुंच चुकी है

जबकि घरेलू उत्पादन 3.80 लाख टन या 27 प्रतिशत के करीब नहीं हो रहा है। इसके आयात पर निर्भरता बहुत बढ़ गई है। सरकार को सूखे    मेवों का उत्पादन बढ़ाने के लिए नीतिगत प्रयास करना चाहिए ताकि आयात में कटौती की जा सके। 

एनडीएफसी के अध्यक्ष ने कहा है कि कुछ सूखे मेवों के आयात पर निर्भरता बढ़कर 100 प्रतिशत के आसपास पहुंच गई है क्योंकि घरेलू प्रभाग में उसका उत्पादन नहीं या नगण्य होता हैं।

सूखे मेवों के आयात पर होने वाला खर्च वर्ष प्रति वर्ष बढ़ता जा रहा है क्योंकि एक तो घरेलू मांग एवं खपत बढ़ रही है और दूसरे, रुपए की विनिमय दर कमजोर पड़ती जा रही है। आयात पर अंकुश लगाना आवश्यक है। 

कौंसिल के अध्यक्ष का कहना था कि सूखे मेवों के आयात के स्रोत का  दायरा बढ़ाए जाने की जरूरत है ताकि आयातकों को बेहतर और सस्ता विकल्प हासिल हो सके।

केवल कुछ ही देशों पर निर्भर रहना सही नहीं है। नए-नए देशों से सस्ता आयात होगा तो सूखे मेवों का दाम नियंत्रण में रहेगा और भारत में उसकी प्रोसेसिंग होने पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

अध्यक्ष के अनुसार कौंसिल द्वारा नई दिल्ली में 'मेवा इंडिया' के तीसरे संस्करण का आयोजन किया जाएगा। यह वार्षिक प्रदर्शनी और कांफ्रेंस नट्स तथा ड्राई फ्रूट्स सेक्टर के लिए काफी उपयोगी साबित होता है।

आगामी सेमिनार में एक नई थीम- जागरूकता को भी शमिल किया जाएगा। सूखे मेवों पर जीएसटी की दर को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत नियत किए जाने से इसकी मांग एवं खपत में अच्छी बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है। इससे आयात पर निर्भरता और भी बढ़ सकती है।